सड़क की बदतर स्थिति को लेकर जमशेदपुर के उपनगरीय इलाकों में विरोध प्रदर्शन
जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय लोगों ने सड़क की बदतर स्थिति के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और तत्काल सरकारी कार्रवाई की मांग की.
जमशेदपुर-जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में सड़कों की खराब स्थिति के विरोध में ग्रामीणों का बढ़ता आंदोलन सड़कों पर उतर आया है.
रविवार को एक जन विरोध मार्च परसुडीह इलाके से निकला, जहां पूर्व मंत्री रामचन्द्र सहिस की उल्लेखनीय उपस्थिति रही.
प्रदर्शन का नेतृत्व जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने किया.
कई वर्षों से खासमहल से सड़क परसुडीहशंकरपुर, बारीगोड़ा, लगभग 8 किलोमीटर तक फैला हुआ, भयानक स्थिति में है, हर जगह बड़े-बड़े गड्ढे फैले हुए हैं, जिससे दैनिक दुर्घटना का खतरा बना हुआ है.
सड़क की स्थिति इस हद तक खराब हो गई है कि निवासियों को डर के साये में इस मार्ग से गुजरना पड़ता है.
कुसुम पूर्ति, जिला परिषद सदस्य ने जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय लोगों ने सड़क की बदतर स्थिति के खिलाफ विरोध मार्च का नेतृत्व किया और तत्काल सरकारी कार्रवाई की मांग की.
उनके अनुसार स्थानीय लोगों ने बार-बार विरोध प्रदर्शन शुरू किया है, लेकिन उनके प्रयासों से कोई खास सुधार नहीं हुआ है.
विरोध के एक प्रतीकात्मक कृत्य में सड़क पर धान रोपा गया, लेकिन यह कठोर कदम भी सरकार और स्थानीय विधायक को जगाने में विफल रहा.
अपनी हताशा व्यक्त करते हुए जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने कहा कि उनके नेतृत्व में जन आक्रोश मार्च निकाला गया.
मार्च में स्थानीय ग्रामीण महिला-पुरुष एवं पूर्व मंत्री रामचन्द्र सहिस ने मुखरता से भाग लिया.
जिला परिषद सदस्य पूर्ति ने राज्य सरकार की कार्यशैली की आलोचना की और जन प्रतिनिधियों की कार्यकुशलता पर सवाल उठाया.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सड़क की हालत स्थानीय लोगों के जीवन को खतरे में डालती है, और निवासी इस मुख्य मार्ग का उपयोग करने से डरते हैं.
उनके मुताबिक, अगर किसी मरीज को इस सड़क से अस्पताल ले जाना हो तो वे ऐसा करने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं.
इस सड़क पर गर्भवती महिलाएं सुरक्षित सफर नहीं कर पाती हैं और बच्चे अक्सर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार या जन प्रतिनिधि तत्काल कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो समुदाय अपने विरोध को एक बड़े आंदोलन में बदलने के लिए तैयार है.
