= 2005 में 37 दिन व 2006 में 15 दिनों तक सांसें अटकाने वाली वे घटनाएं, जिनके बाद अब कैरव की वापसी ने दी राहत
जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर के युवा उद्यमी कैरव गांधी की 14 दिनों के बाद सकुशल घर वापसी ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे व्यापारिक जगत को बड़ी राहत दी है।
मंगलवार तड़के 4:30 बजे जब पुलिस कैरव को लेकर उनके घर पहुंची, तो परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
हालांकि, इस घटना ने शहर के उन पुराने जख्मों को भी हरा कर दिया है, जब बड़े उद्यमियों के अपहरण ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया था।
तीन दशक, तीन बड़ी घटनाएं: जब थम गई थी शहर की रफ्तार
कैरव गांधी की 14 दिनों की कैद और फिर रिहाई ने जमशेदपुर के आपराधिक इतिहास के उन पन्नों को पलट दिया है, जहाँ उद्यमियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हुए थे।
अजय सिंह (2005): राहरगोड़ा-बारीगोड़ा निवासी उद्यमी अजय सिंह का अपहरण जमशेदपुर के इतिहास की सबसे लंबी और तनावपूर्ण घटनाओं में से एक था।
पूरे 37 दिनों के लंबे इंतजार और भारी जनदबाव के बाद उनकी सकुशल वापसी हो सकी थी। उस वक्त इस घटना ने पुलिसिया तंत्र की नींद उड़ा दी थी।
कृष्णा भालोटिया (2006): अजय सिंह मामले के ठीक एक साल बाद, 2006 में उद्यमी कृष्णा भालोटिया के अपहरण ने शहर को फिर दहशत में डाल दिया था।
वे 15 दिनों तक अपहर्ताओं के चंगुल में रहे थे, जिसके बाद पुलिसिया दबिश और सामाजिक दबाव के कारण वे सुरक्षित घर लौट सके थे।
कैरव की वापसी: पुलिस की बड़ी सफलता
13 जनवरी 2026 की दोपहर को लापता हुए कैरव गांधी के मामले में सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स और पुलिस प्रशासन के बीच लगातार समन्वय बना रहा।
कैरव के पिता देवांग गांधी और चेंबर अध्यक्ष मानव केडिया ने एसएसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी की टीम को इस ‘ऑपरेशन रिकवरी’ के लिए साधुवाद दिया है।
व्यापारिक सुरक्षा पर फिर छिड़ी चर्चा
कैरव गांधी की रिहाई के बाद जहां एक ओर जश्न का माहौल है, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक संगठनों में सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
2005 और 2006 की तुलना में 2026 की इस घटना में पुलिस की त्वरित कार्रवाई (14 दिनों में सफलता) को विशेषज्ञों ने सराहा है, लेकिन उद्यमियों का कहना है कि शहर में ऐसा माहौल बनना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस बीच चेंबर अध्यक्ष मानव केडिया ने अनुरोध किया है कि फिलहाल कैरव गांधी को मानसिक शांति की आवश्यकता है, अतः शुभचिंतक अभी उनके घर पर भीड़ लगाने से बचें और परिवार को निजी समय दें।
