रांची: झारखंड ने एक बार फिर प्रशासनिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। राज्य की पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अलका तिवारी ने झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार ग्रहण कर लिया है। यह केवल एक नियुक्ति भर नहीं, बल्कि देश में अपनी तरह का पहला और ऐतिहासिक उदाहरण भी है, जब एक दंपति ने एक ही संवैधानिक पद को अलग-अलग समय पर संभालने का गौरव प्राप्त किया है।
अलका तिवारी से पहले उनके पति, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डी. के. तिवारी भी झारखंड के राज्य निर्वाचन आयुक्त रह चुके हैं।
इतना ही नहीं, यह दंपति झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य में मुख्य सचिव पद की भी जिम्मेदारी निभा चुका है।
देश में यह पहला मामला है जब एक ही राज्य में पति और पत्नी दोनों ने मुख्य सचिव और बाद में राज्य निर्वाचन आयुक्त जैसे शीर्ष पदों को संभाला हो।
दंपति की उपलब्धियों ने बढ़ाया राज्य का मान
डी. के. तिवारी को झारखंड प्रशासन में एक कुशल, नीतिपरक और सुलझे हुए अफसर के तौर पर जाना जाता है। उनके कार्यकाल में कई महत्त्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए।
वहीं, अलका तिवारी भी प्रशासनिक सेवा में अपने विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और सशक्त नेतृत्व के लिए जानी जाती हैं।
उन्होंने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और खाद्य आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में उनका कार्यकाल आने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को पारदर्शिता और निष्पक्षता से संपन्न कराने की दृष्टि से बेहद अहम होगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सराहना
अलका तिवारी की नियुक्ति पर कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं ने बधाई दी है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं। प्रशासनिक हलकों में इसे योग्यता और अनुभव को सम्मान देने वाला निर्णय बताया जा रहा है।
देश में पहली बार ऐसा हुआ…
उपलब्धि विवरण
पति-पत्नी दोनों झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं
पति-पत्नी दोनों झारखंड के राज्य निर्वाचन आयुक्त बने
देश में पहला उदाहरण एक ही राज्य में दंपति द्वारा एक संवैधानिक पद को संभालना
