नारायण आईटीआई : चांडिल में पुण्य तिथि पर शिद्द्त से याद किये गए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, दी गई श्रद्धांजलि

चांडिल/ जमशेदपुर: झारखंड के सरायकेला- खरसावां जिले के चांडिल के लुपुंगडीह में स्थित नारायण आईटीआई में शुक्रवार 2 अगस्त को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।

इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

संस्थान के संस्थापक और झारखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. जटाशंकर पांडे ने इस अवसर पर कहा कि तिलक जी एक सच्चे राष्ट्रवादी, समाज सुधारक, शिक्षक, वकील एवं स्वतंत्रता सेनानी थे।

उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक चरण में जो योगदान दिया, वह प्रेरणादायक है।

अंग्रेज़ों ने उन्हें ‘भारतीय अशांति का जनक’ कहा, जो उनके क्रांतिकारी विचारों का प्रमाण है।”

भारत को जगाने वाले विचारक

लोकमान्य तिलक ने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे लेकर रहूंगा” जैसे क्रांतिकारी नारे के माध्यम से पूरे देश को स्वतंत्रता के लिए जागृत किया। वे भारतीय जनमानस में एक गहरे क्रांतिकारी बदलाव के प्रतीक बन गए थे।

उन्होंने मराठी में ‘केसरी’ और अंग्रेज़ी में ‘मराठा’ जैसे लोकप्रिय समाचार पत्रों की शुरुआत की, जिनमें उन्होंने ब्रिटिश शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति उपेक्षा की कटु आलोचना की।

डॉ. पांडे ने बताया कि तिलक जी की निर्भीक पत्रकारिता और उनके लेखों ने जनता में जोश भरने का कार्य किया, जिसकी वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया।

लाल-बाल-पाल: स्वतंत्रता संग्राम की गरम लहर

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने के बाद तिलक जल्द ही नरमपंथी नीतियों के विरोधी बन गए। 1907 में कांग्रेस दो धाराओं में विभाजित हो गई — गरम दल और नरम दल। तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के साथ गरम दल के प्रमुख स्तंभ बने और “लाल-बाल-पाल” के नाम से प्रसिद्ध हुए।

1908 में उन्होंने क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम विस्फोट के समर्थन में वक्तव्य दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) के मांडले जेल भेजा गया।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संस्थान के कई गणमान्य अतिथि एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से एडवोकेट निखिल कुमार, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, पवन महतो, शशिभूषण महतो, संजीत महतो, कृष्ण पद महतो, अजय मंडल, कृष्णा महतो, गौरव महतो, निमाई मंडल आदि शामिल थे।

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