सारंडा के ग्रामीण झेल रहे दोहरी मार, नक्सली डर के बीच हाथी भी मचा रहे उत्पात
स्कूल में हाथियों का हमला, बच्चों का मिड डे मील ठप
मुख्य बिंदु:
- दो हाथियों ने स्कूल में घुसकर मचाया भारी उत्पात
- मिड डे मील ठप, बच्चों को नहीं मिला भोजन
- कोल्हान के 200 से अधिक गांव हाथी आतंक से प्रभावित
चाईबासा – सारंडा क्षेत्र में नक्सली भय के बीच हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल क्षेत्र में हालात गंभीर बने हुए हैं। यहां ग्रामीण दोहरी समस्या का सामना कर रहे हैं। हालांकि, एक ओर नक्सल प्रभाव से डर बना रहता है। दूसरी ओर, जंगली हाथियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
28 और 29 अप्रैल की रात हाथियों ने उत्पात मचाया। उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय हेन्देदिरी को निशाना बनाया गया। हालांकि, दो हाथी स्कूल परिसर में घुस आए। उन्होंने रसोईघर का दरवाजा तोड़ दिया।
रसोई में रखा राशन पूरी तरह बर्बाद हुआ। चावल, सब्जियां और अन्य सामग्री खा ली गई। दूसरी ओर, कुछ चावल जमीन पर गिराकर खराब कर दिया गया। कई सामान भी टूट गए।
ग्रामीणों में भारी दहशत देखी जा रही है। उनका कहना है कि हाथी पास के जंगल में डेरा डाले हैं। हालांकि, वे कभी भी दोबारा गांव में घुस सकते हैं। इससे लगातार भय बना हुआ है।
हाथियों के हमले का असर स्कूल पर भी पड़ा। मिड डे मील व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। बुधवार को बच्चों को भोजन नहीं मिल सका। हालांकि, बच्चे डरे माहौल में स्कूल पहुंचे।
अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले से नक्सली गतिविधियां परेशान करती हैं। अब हाथियों का डर और बढ़ गया है। बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा लग रहा है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है। हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल भेजने की बात कही गई। हालांकि, स्कूल के नुकसान की भरपाई भी जरूरी बताई गई। साथ ही जल्द राशन उपलब्ध कराने की मांग उठी है।
कोल्हान क्षेत्र में समस्या व्यापक हो गई है। पश्चिमी सिंहभूम के अलावा अन्य जिले भी प्रभावित हैं। दूसरी ओर, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भी हाथियों का आतंक जारी है।
हालांकि, कई गांवों में घर और खेतों को नुकसान हुआ है। हाथियों ने जानमाल का खतरा बढ़ा दिया है। 23 अप्रैल की रात एक बड़ी घटना सामने आई। सरायकेला-खरसावां के चांडिल क्षेत्र में मां-बेटी की मौत हुई।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है। कोल्हान के 200 से अधिक गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों की रात की नींद पूरी तरह उड़ चुकी है।

