RBI ने नहीं बदला रेपो रेट, 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रहेगा, महंगा नहीं होगा लोन, जीडीपी में 7.4% वृद्धि के आसार

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC)की तीन दिवसीय मंथन के बाद यह निर्णय लिया गया है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा। आरबीआई के गवर्नर ने शुक्रवार को घोषणा की कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रहेगा।


उन्होंने ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहेगी, जो पिछले वर्ष से अधिक है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निजी उपभोग और स्थिर निवेश ने आर्थिक विकास को मजबूती प्रदान की है।

आरबीआई ने जीएसटी युक्तिकरण, व्यापार समझौतों और मजबूत कृषि उत्पादन के लेकर अगले वित्त वर्ष (2026-27) की पहली तथा दूसरी तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को शुक्रवार को बढ़ाकर क्रमश: 6.9 और सात प्रतिशत कर दिया।

आरबीआई ने दिसंबर में 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत और जुलाई-सितंबर के लिए 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुमान अप्रैल में अगली मौद्रिक नीति में घोषित किए जाएंगे, जिसमें नए जीडीपी एवं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला को अद्यतन आधार वर्ष (2024) के साथ शामिल किया जाएगा।


मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ” भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बेहतर राह पर बनी हुई है और 2025-26 में वास्तविक जीडीपी के 7.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है जो पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक है।


वैश्विक चुनौतियों के बीच निजी उपभोग और स्थिर निवेश ने वृद्धि को सहारा दिया।” उन्होंने कहा कि 2026-27 में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। कृषि गतिविधियों को जलाशयों के स्वस्थ स्तर, मजबूत रबी बुवाई और फसलों की स्थिति में सुधार से समर्थन मिलेगा।

कॉरपोरेट क्षेत्र के प्रदर्शन में बेहतर सुधार और असंगठित क्षेत्र में बनी गति से विनिर्माण गतिविधियों को बल मिलेगा। कहा कि निर्माण क्षेत्र की वृद्धि मजबूत रहने के आसार हैं। साथ ही घरेलू मांग के मजबूत होने के साथ सेवा क्षेत्र में भी मजबूती बनी रहेगी। गवर्नर ने मांग पक्ष पर कहा कि 2026-27 में निजी उपभोग की गति बनी रहने की उम्मीद है जबकि ग्रामीण मांग स्थिर रहेगी। उन्होंने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) युक्तिकरण और नरम मौद्रिक नीति के निरंतर समर्थन से शहरी उपभोग में सुधार होगा।

आरबीआई के गवर्नर ने कहा , ” तेज होती बैंक ऋण वृद्धि, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां, उच्च क्षमता उपयोग और बुनियादी ढांचे पर सरकार का निरंतर जोर निवेश गतिविधियों को प्रोत्साहन देगा।” उन्होंने कहा कि हाल में संपन्न हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के साथ कई अन्य व्यापार करार मध्यम अवधि में निर्यात को समर्थन देंगे। इसके अलावा, केंद्रीय बजट में घोषित कई उपाय भी वृद्धि के लिए अनुकूल रहने की पूरी संभावना है।

मौद्रिक नीति की प्रमुख बातें

मौद्रिक नीति का रुख ‘तटस्थ’ पर बरकरार।

नीतिगत दर रेपो 5.25 प्रतिशत पर यथावत।

माल एवं सेवा कर सुधार, मौद्रिक ढील और कम महंगाई से निजी उपभोग को समर्थन।

व्यापार समझौतों से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तथा दूसरी तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के अनुमान बढ़ाकर क्रमशः 6.9 प्रतिशत और सात प्रतिशत किया गया।

केंद्रीय बजट के उपाय आर्थिक वृद्धि के अनुकूल।

चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 2.1 प्रतिशत।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तथा दूसरी तिमाही के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई क्रमशः चार प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान।

कीमती धातुओं के अलावा महंगाई दर नरम बनी हुई।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब अमेरिकी डॉलर।

धोखाधड़ी मामलों में ग्राहकों को 25,000 रुपये तक क्षतिपूर्ति देने के लिए जल्द रूपरेखा।

वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने के लिए उपाय प्रस्तावित।

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए बिना गारंटी ऋण सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये की जाएगी।

बैंकों को रीट को ऋण देने की अनुमति दी जाएगी।

कुछ प्रकार की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए शाखा खोलने के नियमों में ढील दी जाएगी।

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक छह से आठ अप्रैल, 2026 को होगी।

धोखाधड़ी वाले लेन-देन में नुकसान को लेकर 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव

छोट मूल्य की धोखाधड़ी वाले लेन-देन में नुकसान पर 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति के लिए एक रूपरेखा लाएगा आरबीआई

भारतीय रिजर्व बैंक छोटे मूल्य की धोखाधड़ी वाले लेन-देन में हुए नुकसान को लेकर ग्राहकों को 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति के लिए एक रूपरेखा लाएगा। इसके साथ, केंद्रीय बैंक उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री, अनधिकृत तरीके से इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन में ग्राहकों की जिम्मेदारी को सीमित करने, कर्ज वसूली तथा वसूली एजेंट को जोड़ने को लेकर दिशानिर्देश जारी करेगा।


चालू वित्त वर्ष की आखिरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की आरबीआई गवर्नर ने। कहा, ”ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले लेन-देन में हुए नुकसान के लिए 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति प्रदान करने को एक रूपरेखा लाने का प्रस्ताव है।” साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच यह घोषणा की गयी है।

”इसके साथ आरबीआई उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री, अनधिकृत तरीके से इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन में ग्राहकों की जिम्मेदारी को सीमित करने, कर्ज वसूली तथा वसूली एजेंट को जोड़ने को लेकर दिशानिर्देश जारी करेगा।” उन्होंने कहा, ”हम डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए संभावित उपायों पर एक परिचर्चा पत्र भी लाएंगे। इन उपायों में विलंबित क्रेडिट और वरिष्ठ नागरिकों जैसे विशिष्ट वर्ग के उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण शामिल हो सकते हैं।”

एमएसएमई के लिए गारंटी मुक्त ऋण की सीमा को 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव

सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए औपचारिक ऋण तक पहुंच सुधारने और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गारंटी मुक्त ऋण की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की घोषणा की है।


शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की छठी और अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए गवर्नर ने कहा, “ये प्रावधान एक अप्रैल, 2026 या उसके बाद स्वीकृत या नवीनीकृत होने वाले सभी एमएसएमई ऋण पर लागू होंगे। इस संबंध में विस्तृत निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।”


बैंकिंग प्रतिनिधियों (बीसी) के संबंध में उन्होंने कहा कि वे वित्तीय सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक ने बीसी के परिचालन की व्यापक समीक्षा करने और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए एक समिति गठित की थी।


इस समिति में आरबीआई, वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय बैंक संघ और नाबार्ड के अधिकारी शामिल थे। समिति की सिफारिशों के आधार पर संबंधित नियामकीय दिशानिर्देशों की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही संशोधन का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा जाएगा।


कीमती धातुओं के मूल्यों में वृद्धि से आरबीआई ने मुद्रास्फीति के अनुमान में मामूली वृद्धि

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कीमती धातुओं के मूल्य में बढ़ोतरी के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर शुक्रवार को 2.1 प्रतिशत कर दिया है। वहीं अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए भी अनुमान ऊपर की ओर संशोधित किए गए हैं।

2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति क्रमशः चार प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआई ने दिसंबर में 2025-26 के लिए इसके दो प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

वहीं 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई दर क्रमशः 3.9 प्रतिशत और चार प्रतिशत आंकी गई थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित कुल मुद्रास्फीति नवंबर में 0.7 प्रतिशत और दिसंबर, 2025 में 1.3 प्रतिशत रही। खाद्य समूह पदार्थों में नरमी बनी रही जबकि ईंधन समूह में मुद्रास्फीति नवंबर और दिसंबर में मध्यम स्तर पर रही। कीमती धातुओं के मूल्यों में तेजी के बावजूद मुख्य मुद्रास्फीति (खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर सीपीआई) भी नियंत्रण में रही।

सोने के अलावा दिसंबर में मुख्य मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि 2026-27 की पहली व दूसरी तिमाही के लिए संशोधित सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत बना हुआ है। यह अनुकूल होने के साथ ही मुद्रास्फीति लक्ष्य के करीब है।

उन्होंने कहा, ” मुद्रास्फीति अनुमान को मामूली रूप से ऊपर की ओर संशोधन मुख्यत: कीमती धातुओं के मूल्यों में बढ़ोतरी के कारण किया गया। इनका योगदान करीब 0.60 प्रतिशत से 0.70 प्रतिशत है। अंतर्निहित मुद्रास्फीति अब भी निम्न स्तर पर बनी हुई है।”

गवर्नर ने कहा कि निकट भविष्य का परिदृश्य बताता है कि खरीफ उत्पादन अच्छा रहने, खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार, अनुकूल रबी बुवाई एवं पर्याप्त जलाशय स्तर के चलते खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं।


कहा कि कीमती धातुओं के मूल्यों से संभावित अस्थिरता को छोड़ दें तो मुख्य मुद्रास्फीति सीमित दायरे में रहने के आसार हैं। भूराजनीतिक अनिश्चितता, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रतिकूल मौसम आदि मुद्रास्फीति के बढ़ने को लेकर जोखिम उत्पन्न करते हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2024) के 12 फरवरी को जारी होने के मद्देनजर आरबीआई समूचे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान अप्रैल, 2026 की नीति घोषणा में पेश करेगा।

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