पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम थाना क्षेत्र में काड़ा लड़ाई : उग्र भैंसा ने किया हमला, पिता की मौत, पुत्र गंभीर
पशु क्रूरता कानूनों के कारण प्रतिबंधित है काड़ा लड़ाई, प्रशासन की अनुमति के बिना आयोजन
Patamda: पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलडीह पंचायत के जोबा गांव स्थित फुटबॉल मैदान में सोमवार को युवा कमेटी की ओर से आयोजित काड़ा (भैंसा) लड़ाई (प्रतियोगिता) के दौरान उग्र भैंसे के हमले से एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि इस घटना में उनके बेटे को गंभीर चोटें आई हैं और वह एमजीएम अस्पताल में इलाजरत है।
घटना दोपहर करीब एक बजे की है जिसमें चार जोड़े की लड़ाई होने के बाद भागने के क्रम में एक बाइक पर भैंसा ने ग्रामीण सड़क से गुजर रहे बाइक सवारों पर हमला कर दिया। सूत्रों के मुताबिक इस घटना के बाद भी मेला जारी रहा और दो जोड़े की लड़ाई हुई। सूचना पाकर दोपहर करीब ढाई बजे घटनास्थल पर पहुंची बोड़ाम पुलिस ने सभी को खदेड़ कर भगा दिया और मेला को भी बंद करवाया। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल जोबा गांव निवासी सुभाष कर्मकार (55) एवं उसके पुत्र सागर कर्मकार (15) को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया जहां इलाज के दौरान सुभाष ने दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने सुभाष के शव का एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों को सौंप दिया।
थाना प्रभारी मनोरंजन कुमार ने बताया कि उन्हें मेला के संबंध में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं थी और गुप्त तरीके से मेला का आयोजन किया गया था। उन्होंने बताया कि मेला कमेटी के बारे में पता लगाया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि झारखंड समेत पूरे देश में भैंसा लड़ाई पर प्रतिबंध लगाने एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा आयोजन की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण पिछले कई वर्षों से पटमदा, कमलपुर एवं बोड़ाम थाना क्षेत्र के अलावा पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के विभिन्न गांवों में भैंसा लड़ाई का आयोजन लगातार होता रहा है।
इसके लिए कमेटी की ओर से किसी तरह का कोई पर्चा भी नहीं छपवाया जाता, बल्कि कुछ यूट्यूब चैनल समेत सोशल मीडिया प्लेटफार्म के अन्य माध्यमों से इसके प्रेमियों को सूचित किया जाता है। इसका आयोजन वैसे जगहों पर किया जाता है जो कम से कम दो थाना क्षेत्रों या दोनों राज्यों की सीमा पर अवस्थित हो ताकि प्रशासन को इसकी भनक नहीं हो।
प्रतिबंधित काड़ा लड़ाई” (Kada Ladai) झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम ब्लॉक में होने वाली एक पारंपरिक बैल की लड़ाई है, जो अब पशु क्रूरता कानूनों के कारण प्रतिबंधित है; यह एक खतरनाक खेल था जिसमें बैल आपस में टकराते थे, और इसमें अक्सर चोटें या मौतें भी होती थीं, सोवार को भी ऐसी ही घटना में एक पिता की मौत हो गई।
