अपने बच्चों को मातृभाषा अवश्य सिखाएं : राष्ट्रपति
मिशन मोड पर 24 हजार करोड़ से 75 पीवीटी आदिवासी वर्ग का होगा विकास
उनके पास घर नहीं हैं, उनके कपड़े नहीं हैं और हम लोग अमृतकाल वर्ष मना रहे
जमशेदपुर : शहर के करनडीह में राष्ट्रपति ने ओलचिकी के शताब्दी समारोह के दौरान कहा कि ओलचिकी को जन- जन तक पहुंचाने के लिए दीवार पर संताली लिपि में कलाकृतियाँ बनायें। उन्होंने कहा कि ओलचिकी के विस्तार और उत्थान में मेरा भी छोटा सा योगदान रहा है। कहा कि अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा अवश्य सिखायें।


एकजुट होकर इसे और समृद्ध बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि सिर्फ संताली ही नहीं हो, मुंडा, समेत सभी का उत्थान करना है। इसके लिए जो आगे रहेगा उन्हें पीछे रह गई भाषा को साथ खींच कर आगे ले आना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के 75 पीवीटी ट्राइबल (पर्टिक्यूलरली वुलरेनेबल ट्राइबल ग्रुप) अभी भी पेड़ में रहते हैं। उनके पास घर नहीं हैं। उनके कपड़े नहीं हैं और हम लोग अमृतकाल वर्ष मना रहे हैं।
आख़िरकार सरकार ने बात सुनी और बिरहोर समेत सभी आदिवासी के लिए 24 हज़ार करोड़ से उनके विकास को काम करने का मिशन शुरू किया। कहा कि ये आदिवासी नहीं जानते कि पीएम आवास बन रहे है। ये लोग यह भी नहीं जानते कि सीमेंट कहाँ से आएगा, घर कैसे बनेगा। इसलिए उन्हें घर बनाकर देना होगा। राष्ट्रपति ने कहा मेरे लोग (आदिवासी) अभी भी बच्चे हैं। इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता। इसलिए उन्हें पैसे नहीं दें। इन्हें घर बनाकर दें।
राष्ट्रपति ने कहा लेकिन हमें भी सीखना होगा। हमारे माता पिता भी हमेशा हमारा हाथ पकड़कर नहीं चलते। हमें ख़ुद भी प्रयास करना होगा। दूसरों को देख कर चलना होगा। पहले जब मैं राजनीति में नहीं थी, तो माँ से पूछा तो उन्होंने बताया कि शिक्षा कितना ज़रूरी है, लेकिन इससे हम हमारे गाँव घर से अलग हो गए, लेकिन समय निकाल कर हमें अपने गांव, अपने भाई बहनों का हाल चाल लेना है। आज हमारे अपने लोग बड़े – बड़े ऑफिसर हैं, हमें अपने पीछे रह गए लोगों को भी देखना है। हमें कम से कम दो लोगों को विकसित करना है।
हमें क्षमता के हिसाब से गांव को गोद लेना है। ताकि जो पीछे रह गए उन्हें अपने पीछे खड़े कर सकें। उन्होंने करनडीह में महिलाओं को आगे मौका दिए जाने पर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने पर वे अपना रास्ता खोज लेंगे। कहा कि मुझे ख़ुशी है कि हमारे लोग अब आगे बढ़ते दिख रहे हैं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि संतालों के विकास को हमें ख़ुद प्रयास करना होगा।
संताली राइटर्स का योगदान अभूतपूर्व, ओलचिकी संतालों की मजबूत पहचान : राष्ट्रपति
Jamshedpur: जमशेदपुर के करनडीह में राष्ट्रपति ने संताली राइटर्स के योगदान पर कहा कि आदिवासियों के स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा के लिए इनका योगदान अभूतपूर्व है। कहा कि हर साल यह संगठन ओलचिकी उत्थान को काम करती है। अपने दैनिक जीवन से समय निकाल कर ये भाई बहन ओलचिकी के लिए काम कर रहे हैं और पंडित रघुनाथ मुर्मू के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने संविधान के संताली अनुवाद पर कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी के 100 साल पर ओलचिकी में संविधान का प्रकाशन किया गया। यह कार्य भी संताली समाज को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रपति ने कहा कि संताली आठवीं अनुसूची में शामिल हुआ है, इसलिए इसमें भी देश चलाने वाले रूल रेगुलेशन की जानकारी हमारे लोगों को होनी चाहिए। नियम कानून नहीं जानने के कारण कई बेगुनाह लोग जेल में थे। हमारे लोग अब भी जितने शिक्षित होना चाहिए इतने नहीं हुए हैं, इसलिए हमारे लोगों को अपनी भाषा में यह सारी जानकारी होनी चाहिए।
आज मैं जिस जगह पहुंची हूं, इसमें अपने लोगों का प्रेम और इष्टदेवों का आशीष है। इसलिए मेरा कर्तव्य है कि अपने समाज और लिपि के लिए काम करूं। हम सब जानते हैं कि भारत और विश्व में कई जगह संताल निवास करते हैं। बड़े महानगरों से लेकर अलग- अलग शहरों में हमारे लोग रह रहे हैं। आदिवासियों में स्नातकों की सबसे अधिक आबादी है इसलिए इसका अपना अधिकार सुनिश्चित है। ओलचिकी संतलों की मजबूत पहचान है। इसी से समाज के लोगों में एकता आ रही है। यह आयोजन भी उसी में से एक है।
ओलचिकी संतालों की मजबूत पहचान : राष्ट्रपति
Jamshedpur: जमशेदपुर के करनडीह में राष्ट्रपति ने संताली राइटर्स के योगदान पर कहा कि आदिवासियों के स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा के लिए इनका योगदान अभूतपूर्व है। कहा कि हर साल यह संगठन ओलचिकी उत्थान को काम करती है। अपने दैनिक जीवन से समय निकाल कर ये भाई बहन ओलचिकी के लिए काम कर रहे हैं और पंडित रघुनाथ मुर्मू के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने संविधान के संताली अनुवाद पर कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी के 100 साल पर ओलचिकी में संविधान का प्रकाशन किया गया। यह कार्य भी संताली समाज को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रपति ने कहा कि संताली आठवीं अनुसूची में शामिल हुआ है, इसलिए इसमें भी देश चलाने वाले रूल रेगुलेशन की जानकारी हमारे लोगों को होनी चाहिए। नियम कानून नहीं जानने के कारण कई बेगुनाह लोग जेल में थे। हमारे लोग अब भी जितने शिक्षित होना चाहिए इतने नहीं हुए हैं, इसलिए हमारे लोगों को अपनी भाषा में यह सारी जानकारी होनी चाहिए।
आज मैं जिस जगह पहुंची हूं, इसमें अपने लोगों का प्रेम और इष्टदेवों का आशीष है। इसलिए मेरा कर्तव्य है कि अपने समाज और लिपि के लिए काम करूं। हम सब जानते हैं कि भारत और विश्व में कई जगह संताल निवास करते हैं। बड़े महानगरों से लेकर अलग- अलग शहरों में हमारे लोग रह रहे हैं। आदिवासियों में स्नातकों की सबसे अधिक आबादी है इसलिए इसका अपना अधिकार सुनिश्चित है। ओलचिकी संतलों की मजबूत पहचान है। इसी से समाज के लोगों में एकता आ रही है। यह आयोजन भी उसी में से एक है।
