समाजसेवी रतन तिर्की ने कहा-बिरसा मुंडा से मिली थी सीएनटी एक्ट की प्रेरणा, 1908 में किया गया लागू

एनआईटी जमशेदपुर में जनजातीय गौरव दिवस का उत्सव उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया

जमशेदपुर : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में जनजातीय गौरव दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती का स्मरण करते हुए भारत के जनजातीय समुदायों के अमूल्य योगदान को नमन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर प्रसिद्ध जनजातीय नेता एवं समाजसेवी रतन तिर्की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्री तिर्की ने जनजातीय पहचान, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को समानता, गरिमा और संघर्षशीलता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जनजातीय गौरव दिवस भारत सरकार के स्वर्णिम कार्यकाल पहल के अंतर्गत एक पखवाड़ा के रूप में मनाया जा रहा है।

इस अवसर पर भारत के संविधान की उद्देशिका (Preamble) को मुख्य अतिथि की उपस्थिति में सामूहिक रूप से पढ़ा गया, जो समानता और एकता की भावना का प्रतीक है। तिर्की ने स्मरण कराया कि झारखंड से तीन प्रमुख जनजातीय प्रतिनिधि — जयपाल सिंह मुंडा, देवेंद्र नाथ सामंत, और बोनिफेस लकड़ा — संविधान सभा के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय नायकों के इस गौरवशाली इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना आवश्यक है।

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि इसके निर्माण की प्रेरणा भगवान बिरसा मुंडा से मिली थी। इस अधिनियम का प्रारूप जे. बी. हॉपमैन द्वारा 1903 में तैयार किया गया था और इसे 1908 में लागू किया गया।

तिर्की ने रांची में माननीय प्रधानमंत्री से हुई अपनी मुलाकात के अनुभव भी साझा किए और विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा —

“अपना संकल्प दृढ़ रखें, समाज को आगे बढ़ाएँ और पुस्तकों से परे सोचें। पहले स्वयं पर गर्व करें, तभी आप अपने समाज को ऊपर उठा सकते हैं।”

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे वीर बिरसा मुंडा की गाथाओं को विश्वभर में फैलाएँ और इस बात पर गर्व करें कि वे झारखंड की भूमि से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर ने सभी को शुभकामनाएँ दीं और भगवान बिरसा मुंडा जैसे जनजातीय नायकों के त्याग और योगदान को स्मरण करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से भारत की जनजातीय विरासत पर गर्व करते हुए एक समावेशी और प्रगतिशील समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

उप निदेशक प्रो. आर. वी. शर्मा, कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. एस. के. सारंगी, तथा डीन (छात्र कल्याण) डॉ. आर. पी. सिंह ने भी भारत की समृद्ध जनजातीय धरोहर पर अपने विचार साझा किए।

यह आयोजन एनआईटी जमशेदपुर की समावेशिता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय गौरव के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है तथा विद्यार्थियों को देश के जनजातीय नायकों के मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करता है।

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