जमशेदपुर। शहर के मानगो डिमना चौक स्थित पंचवटी कॉलोनी से मंगलवार 21 अक्टूबर को तड़के एक दुखद समाचार ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया।
जमशेदपुर के वरिष्ठ समाजसेवी महेंद्र नारायण सिंह की धर्मपत्नी लोंगा देवी का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
लोंगा देवी अपने पीछे तीन पुत्र—कमाल सिंह, विमल सिंह और निर्मल सिंह, एक पुत्री इंदु सिंह, तथा दामाद चंद्रदेव सिंह राकेश समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके मझले पुत्र विमल सिंह, टाटा वर्कर्स यूनियन के वरिष्ठ नेता हैं, जबकि दामाद चंद्रदेव सिंह राकेश, झारखंड के वरिष्ठतम पत्रकारों में गिने जाते हैं। उनके परिवार का सामाजिक, राजनीतिक और पत्रकारिता के क्षेत्र में गहरा प्रभाव है।
लोंगा देवी की अंतिम यात्रा मंगलवार को दोपहर दो बजे उनके आवास पंचवटी कॉलोनी, डिमना चौक से निकलेगी और भुइयाडीह स्थित स्वर्णरेखा बर्निंग घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सुबह से ही उनके घर पर शोक संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लगा हुआ है। शहर के कई प्रतिष्ठित सामाजिक, राजनीतिक और श्रमिक संगठनों से जुड़े लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
महेंद्र नारायण सिंह के छोटे भाई गोरखनाथ सिंह, उनके दामाद और आरबीएल बैंक में जोनल मैनेजर आलोक सिंह समेत परिवार के अन्य सदस्यों के पहुंचने के बाद अंतिम यात्रा निकलेगी. महेंद्र नारायण सिंह के एक अन्य छोटे भाई ज्ञानेंद्र सिंह के भी आने का इंतजार किया जा रहा है।
उनके निधन से समाजसेवी महेंद्र नारायण सिंह की जीवन संगिनी के रूप में एक लंबा साथ समाप्त हुआ, जो न केवल पारिवारिक बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों में भी एक मजबूत स्तंभ थीं।
पूर्व मंत्री व झारखंड के वरिष्ठ विधायक सरयू राय और समाजसेवी सह उद्यमी, विकास सिंह समेत अनेक लोगों ने उनके निधन पर गहरी संवेदना जताते हुए
ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में धैर्य और संबल दें।
धर्मपरायणता, सेवा व संस्कार की मूरत
लोंगा देवी न सिर्फ एक धार्मिक और संस्कारी महिला थीं, बल्कि सामाजिक जीवन में भी अंतिम समय तक सक्रिय रहीं।
बिहार के भोजपुर जिले में आरा के पास स्थित व पशु मेले के लिए विख्यात गांव श्रीपालपुर के मूल निवासी महेंद्र नारायण सिंह का परिवार वर्षों से जमशेदपुर के सामाजिक और जनसेवा से जुड़े कार्यों में अग्रणी रहा है।
ऐसे में लोंगा देवी का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
वे अपने सहज स्वभाव, धर्मनिष्ठा और सेवा भाव के लिए जानी जाती थीं। घर-परिवार और समाज के प्रति उनका समर्पण अनुकरणीय था।
