— आठ हाथियों का दल बरपा रहा कहर, ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग ने जारी की चेतावनी
जमशेदपुर/बहरागोड़ा : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र के रोटेबांध गांव में रविवार को उस समय अफरातफरी का माहौल बन गया, जब जंगली हाथियों का एक झुंड अचानक गांव की सीमा में दाखिल हो गया।
दोपहर करीब 1 बजे आठ हाथियों का यह दल खेतों और जंगल के किनारे घूमता हुआ देखा गया।
ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हाथियों को देख खेतों में काम कर रहे किसान अपने औजार छोड़कर जान बचाकर भागे।
घटना की सूचना तत्काल भूतिया वनक्षेत्र कार्यालय को दी गई।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथियों को आबादी वाले इलाके से बाहर खदेड़ने का प्रयास शुरू किया गया।
इस दौरान गांव की गलियों और खेतों में भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के झुंड ने धान, अरहर, मड़ुआ और सब्जियों की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है।
खेतों में लगी फसल को रौंदने के साथ-साथ कई जगहों पर खेत की मेढ़ और बाड़ भी तोड़ दी गई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार एवं वन विभाग द्वारा क्षतिपूर्ति (मुआवजा) की प्रक्रिया त्वरित रूप से शुरू की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
गांव के मुखिया और कई पंचायत प्रतिनिधियों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष इस क्षेत्र में हाथियों का आतंक देखने को मिलता है, परंतु समस्या का कोई स्थायी हल नहीं निकाला गया है। गांव के चारों ओर सौर बाड़बंदी, साउंड अलर्ट सिस्टम, और रैपिड रिस्पॉन्स टीम की आवश्यकता है।
वन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। विभाग की टीमें लगातार झुंड को जंगल की ओर लौटाने के प्रयास में जुटी हैं।
इस बीच विभाग ने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि —ग्रामीण किसी भी स्थिति में हाथियों के पास न जाएं।हाथियों को भगाने या डराने का प्रयास न करें । रात के समय खेतों या जंगल की ओर न निकलें। लकड़ी, मशरूम या अन्य वन उत्पाद के लिए जंगल में न जाएं।
वनपाल ने बताया कि क्षेत्र में ड्रम बजाने, मशाल और अन्य पारंपरिक उपायों से हाथियों को भगाने की रणनीति अपनाई जा रही है। साथ ही दूरदराज के गांवों को भी अलर्ट किया गया है।
गौरतलब है कि बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बीते कुछ वर्षों में हाथियों के झुंड ने कई बार फसलों, घरों और जानमाल को नुकसान पहुंचाया है।
वन विभाग में पदाधिकारी रहे रमेश प्रसाद सिंह के अनुसार जंगल क्षेत्र में भोजन और पानी की कमी के कारण हाथियों का रुख अब मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहा है।
इससे न केवल फसलें प्रभावित हो रही हैं, बल्कि ग्रामीणों की जान भी खतरे में पड़ती जा रही है। उनकी नजर में रोटेबांध में हुई यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जंगल और मानव बस्तियों के बीच संतुलन की जरूरत अब केवल चर्चा का विषय नहीं, एक आपात स्थिति बन चुकी है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और वन विभाग आने वाले दिनों में किस तरह की ठोस रणनीति अपनाते हैं, जिससे ग्रामीणों और वन्य जीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
