रांची : नक्सल प्रभावित झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में माओवादी गतिविधियों ने एक बार फिर से सुरक्षाबलों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जराईकेला थाना क्षेत्र के कोलबेंगा गांव में रविवार तड़के भाकपा (माओवादी) से जुड़े हथियारबंद नक्सलियों ने एयरटेल कंपनी के मोबाइल टावर को आग के हवाले कर दिया। घटना के बाद इलाके में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है और आम लोगों में दहशत का माहौल है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तड़के हथियारों से लैस माओवादी गांव में घुसे और मोबाइल टावर परिसर में मौजूद कर्मचारियों को बंदूक की नोक पर भगा दिया। इसके बाद उन्होंने टावर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी, जिससे पूरा ढांचा जलकर खाक हो गया।
इस हमले को माओवादी संगठन द्वारा घोषित “प्रतिरोध सप्ताह” के तहत अंजाम दिया गया है, जो 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है। संगठन यह सप्ताह हाल के महीनों में मुठभेड़ों में मारे गए अपने सदस्यों के विरोध में मना रहा है।
दो दिन पहले हुए थे IED धमाके, एक जवान शहीद
इस घटना से पहले शुक्रवार की रात सारंडा जंगल में भी नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाकर चार IED धमाके किए थे।
इस हमले में सीआरपीएफ हेड कॉन्स्टेबल महेंद्र लश्कर शहीद हो गए थे, जबकि दो अन्य अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
अब मोबाइल टावर जलाने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
दूसरी ओर मोबाइल टावर में आगजनी की जानकारी मिलते ही पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम घटनास्थल पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर दी गई।
जंगलों में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
उधर प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग बनाए रखें। इलाके में अफरातफरी की स्थिति न बने, इसके लिए गांव-गांव जाकर लोगों को संवेदनशीलता और सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि माओवादी संगठन “प्रतिरोध सप्ताह” के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और दहशत का माहौल बनाने के लिए इस तरह की वारदातें कर रहे हैं। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने भी मोर्चा संभाल लिया है और माओवादियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार छापेमारी और सघन गश्ती अभियान चलाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार का कहना है कि पश्चिमी सिंहभूम में माओवादी हिंसा एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और ग्रामीण जीवन को चुनौती दे रही है।
मोबाइल टावर जलाकर नक्सलियों ने न केवल संचार व्यवस्था को बाधित किया है, बल्कि राज्य के विकास की राह में भी रोड़ा अटकाने की कोशिश की है।
हालांकि, सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और प्रशासन की सतर्कता यह संकेत देती है कि माओवादियों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है — और जवाब भी दिया जाएगा।
