आपदा में भी मानसिक संबल जरूरी, जमशेदपुर के श्रीनाथ विश्वविद्यालय में जगी जागरूकता की अलख

== संकट में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका पर संगोष्ठी

जमशेदपुर | विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर श्रीनाथ विश्वविद्यालय, जमशेदपुर में मेंटल हेल्थ क्लब एवं योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सेवाओं तक पहुँच: आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य विषय पर एक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समाज के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना था, विशेषकर आपदा एवं संकट की घड़ी में मानसिक सेवाओं की उपयोगिता को रेखांकित करना।

कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी के आयुर्वेद संकाय की विकृति विज्ञान विशेषज्ञ सुश्री दिव्या सिंह उपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि आपदा, महामारी, युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित होता है। ऐसे समय में व्यक्ति को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आयुर्वेद, योग और ध्यान महत्वपूर्ण साधन हैं।

उन्होंने प्राणायाम, सकारात्मक सोच और ध्यानाभ्यास को मानसिक संतुलन का आधार बताते हुए इनकी वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की।

योग को जीवनशैली में अपनाने पर ज़ोर
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव भी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कुलपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि योग सिर्फ एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है। यदि हर विद्यार्थी प्रतिदिन 45 मिनट योगाभ्यास का संकल्प ले, तो वह मानसिक और शारीरिक रूप से संतुलित रहेगा।”

वहीं कुलसचिव ने अनुशासन और ध्यानाभ्यास को जीवन की सफलता की कुंजी बताया।

प्रस्तुति व सहभागिता रही विशेष
कार्यशाला की शुरुआत योग विभाग की विभागाध्यक्षा के स्वागत भाषण से हुई।
इसके उपरांत मेंटल हेल्थ क्लब की टीम ने कार्यशाला की रूपरेखा साझा की। मुख्य वक्ता ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियाँ, नीतिगत पहलें, एवं आपातकालीन सेवाओं की सुलभता पर प्रकाश डाला।

विद्यार्थियों का जीवंत प्रदर्शन
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के योग विभाग के छात्रों ने ध्यान, योगासन, प्राणायाम और सुखद मानसिक भावनाओं का प्रदर्शन कर यह दर्शाया कि योग किस तरह मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त करता है।
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञ से अपने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान पाया।

आयोजन को मिली प्रतिभागियों की सराहना
प्रतिभागियों ने कार्यशाला को सार्थक, शिक्षाप्रद और संवेदनशीलता बढ़ाने वाला प्रयास बताया।
उन्होंने माना कि ऐसे आयोजन समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।

कार्यशाला के समापन पर विश्वविद्यालय प्रशासन, मेंटल हेल्थ क्लब, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग तथा फॉर्मेसी विभाग के समर्पण की प्रशंसा की गई। फार्मेसी विभाग के शिक्षक एवं छात्र पूरे आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल रहे।

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