रांची/जमशेदपुर :झारखंड सरकार ने राज्य के युवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक नई योजना का ऐलान किया है।
इसके तहत राज्य के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को उनकी डिजिटल पहुंच, सामाजिक प्रभाव और सकारात्मक सामग्री निर्माण के आधार पर 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य है कि राज्य के अंदर से उभर रहे डिजिटल क्रिएटर्स को आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान कर उन्हें स्थानीय ब्रांडिंग, सांस्कृतिक संरक्षण और विकासात्मक योजनाओं के प्रचार-प्रसार से जोड़ा जा सके।
डिजिटल प्रभाव योजना का क्या है उद्देश्य
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के तहत लागू की जा रही इस योजना का उद्देश्य राज्य के स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को सशक्त बनाना है।
सरकार का मानना है कि आज सोशल मीडिया एक बड़ा संप्रेषण माध्यम बन चुका है और इसके ज़रिए युवाओं को रोजगार और सामाजिक नेतृत्व के अवसर भी मिल सकते हैं।
विभाग के एक अधिकारी के अनुसार झारखंड में टैलेंट की कमी नहीं है। लेकिन संसाधनों की कमी और सही मंच न मिलने से कई प्रतिभाएं दब जाती हैं। यह योजना उन युवा आवाज़ों को मंच देगी जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
किसे मिलेगा लाभ? पात्रता क्या है?
योजना के तहत उन युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करेंगे:
उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे Instagram, YouTube, Facebook या X) पर कम से कम 50,000 फॉलोअर्स/सब्सक्राइबर्स हों।
वे स्थानीय, सामाजिक, सांस्कृतिक या विकासात्मक विषयों पर नियमित और सकारात्मक कंटेंट बनाते हों।
कंटेंट में अश्लीलता, नफरत या भ्रामक जानकारी नहीं होनी चाहिए।
आवेदक को झारखंड राज्य का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
क्या मिलेगा इस योजना के तहत?
वित्तीय सहायता: चुने गए इन्फ्लुएंसर्स को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन: डिजिटल स्किल्स, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडिटिंग और ब्रांडिंग के क्षेत्र में विशेष वर्कशॉप्स।
सरकारी अभियानों से जुड़ने का मौका: इन्हें सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार से जोड़ा जाएगा।
सर्टिफिकेशन और सरकारी मान्यता: चयनित इन्फ्लुएंसर्स को सरकारी ‘डिजिटल एम्बेसडर’ के रूप में मान्यता दी जा सकती है।
राज्य की छवि निर्माण में युवाओं की भागीदारी
सरकार का मानना है कि डिजिटल युग में झारखंड की सकारात्मक छवि निर्माण में स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स की बड़ी भूमिका हो सकती है।
चाहे वह पर्यटन स्थलों का प्रचार हो, स्थानीय हस्तशिल्प की ब्रांडिंग, जनजातीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार या फिर सरकारी योजनाओं की जानकारी— इन सभी क्षेत्रों में सोशल मीडिया की ताकत को अब राज्य सरकार एक संसाधन के रूप में उपयोग करेगी।
योजना से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार झारखंड की कहानी को अब झारखंड के ही युवा दुनिया तक पहुंचाएंगे।
क्या कह रहे हैं युवा क्रिएटर्स?
राज्य में सोशल मीडिया से जुड़े युवाओं ने इस पहल का स्वागत किया है।
जमशेदपुर की यूट्यूबर पूजा मुंडा कहती हैं कि सरकारी मान्यता और सहायता से हमारा हौसला बढ़ेगा। यह एक बड़ा कदम है जिससे गांव और कस्बों के युवा भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
वहीं, रांची के इंस्टाग्राम क्रिएटर आदित्य तिवारी का कहना है कि अगर सरकार रचनात्मक और सकारात्मक कंटेंट को बढ़ावा दे रही है तो यह पूरे समाज के लिए फायदेमंद होगा।
आवेदन प्रक्रिया जल्द
सरकार जल्द ही इस योजना के लिए आधिकारिक पोर्टल और आवेदन प्रक्रिया की घोषणा करेगी। आवेदन ऑनलाइन लिए जाएंगे और एक विशेषज्ञ समिति द्वारा चयन किया जाएगा।
जानकारों का कहना है कि झारखंड सरकार की ‘डिजिटल प्रभाव योजना’ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि एक नए झारखंड की डिजिटल नींव रखने की कोशिश है।
यह पहल न केवल युवाओं को डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करेगी, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को भी देश-दुनिया के सामने लाने में मदद करेगी.
जानिए क्या होता है सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर” एक ऐसा व्यक्ति होता है जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे Instagram, YouTube, Facebook, X (Twitter), आदि) पर अपनी सक्रियता, लोकप्रियता और भरोसेमंद छवि के कारण लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
सरल शब्दों में समझें तो
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर वह होता है जिसके पास बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होते हैं और जिसकी बातें लोग सुनते और मानते हैं। ये लोग अपने कंटेंट से दूसरों की सोच, पसंद, खरीदने के फैसले, या व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
