झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में कृमि मुक्त होंगे बच्चे, सुरक्षित होगा भविष्य, जमशेदपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की शुरुआत
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में आज राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस धूमधाम से मनाया गया। साकची हाई स्कूल में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी एवं सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाकर किया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. रंजीत पांडा, जिला प्रोग्राम मैनेजर विजय कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक हकीम प्रधान, शहरी स्वास्थ्य प्रबंधक मनीष कुमार, सुमन कुमार मंडल और प्रदीप कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इन सभी ने बच्चों को दवा पिलाने के साथ अभिभावकों और शिक्षकों को जागरूक किया।
इस मौके पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि कृमि संक्रमण मौन महामारी की तरह है। शिक्षा और पोषण तभी सार्थक होंगे जब बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे।
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि हर बच्चे को साल में दो बार यह दवा लेना जरूरी है। यह पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य की सेहत की गारंटी है।
डॉ. रंजीत पांडा ने इसे सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए सभी से सहयोग की अपील की।
क्यों जरूरी है कृमि मुक्ति
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना है। 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्त कराना इसका मुख्य उद्देश्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कृमि संक्रमण बच्चों में कुपोषण, खून की कमी, विकास में बाधा और पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डालता है।
अभियान की खास बातें
सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में दवा का वितरण
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों तक दवा पहुंची
एएनएम, आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी
अभिभावकों को बच्चों की सेहत के प्रति जागरूक करने पर जोर
अभियान की प्रगति पर निगरानी के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित
भविष्य की रणनीति
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। 19 सितंबर को मॉप-अप राउंड चलाया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रह जाए। साथ ही अगले चरणों में भी इस पहल को निरंतर जारी रखा जाएगा।
वास्तव में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों की सेहत और शिक्षा से सीधे जुड़ा हुआ अभियान है। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जिस सक्रियता के साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाया है, उससे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में जिले का हर बच्चा कृमि संक्रमण से मुक्त होगा।

