गीतकार गंगा प्रसाद अरुण ‘निर्मल मिलिंद स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित

बीमारी के बावजूद, गंगा प्रसाद अरुण ने साहित्य में उनके योगदान के लिए जश्न मनाया।

प्रमुख बिंदु:

  • गंगा प्रसाद अरुण को ‘निर्मल मिलिंद स्मृति पुरस्कार’ मिला।
  • जयनंदन निर्मल मिलिंद को साहित्यिक नर्सरी कहते हैं.
  • समारोह के दौरान डॉ. रागिनी भूषण ने अरुण का गीत सुनाया।

जमशेदपुर – प्रसिद्ध गीतकार गंगा प्रसाद अरुण को बिरसानगर स्थित उनके आवास पर आयोजित एक भावपूर्ण समारोह में ‘निर्मल मिलिंद स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

यह पुरस्कार, जिसमें ₹11,000 और एक प्रमाण पत्र शामिल है, प्रसिद्ध कथाकार जयनंदन द्वारा प्रदान किया गया। अरुण की कैंसर से चल रही लड़ाई को देखते हुए, उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनके घर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

निर्मल मिलिंद की साहित्यिक विरासत

जयनंदन ने भारतीय साहित्य में निर्मल मिलिंद के व्यापक योगदान को याद करते हुए उन्हें एक “साहित्यिक नर्सरी” बताया, जिसने उभरते लेखकों को पोषित किया। मिलिंद का काम कविता, उपन्यास, नाटक, व्यंग्य और बच्चों के साहित्य तक फैला हुआ है। बज्जिका में उनका अग्रणी उपन्यास, गितियाविशेष रूप से उल्लेखनीय था।

जयनंदन ने कहा, ”निर्मल मिलिंद हमेशा कविता के बारे में सोचते रहते थे।” “उनकी रचनाएँ राष्ट्रीय प्रकाशनों में छपीं और विविध शैलियों को छुआ।”

डॉ. रागिनी भूषण ने मिलिंद द्वारा साहित्य में महिलाओं को प्रोत्साहन पर प्रकाश डाला। उन्होंने अरुण की रचना का गीतात्मक पाठ कर कार्यक्रम को समृद्ध बनाया।

गंगा प्रसाद अरुण को शुभकामनाएँ

जयनंदन ने अरुण की गहरी साहित्यिक अंतर्दृष्टि की प्रशंसा की और उनके ठीक होने की आशा व्यक्त की। कवि और पत्रकार दिनेश्वर प्रसाद सिंह ने भी मिलिंद के इन दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध को याद करते हुए अरुण की सराहना की। सिंह ने कहा, “अरुण जी अपना स्वास्थ्य पुनः प्राप्त कर लेंगे और साहित्य में योगदान देना जारी रखेंगे।”

व्यंग्यकार और संपादक अरविंद विद्रोही ने इस पुरस्कार को अरुण की प्रतिभा के लिए उपयुक्त मान्यता बताया। उन्होंने साहित्य में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के मिलिंद के प्रयासों पर जोर दिया।

एक सफल आयोजन

मिलिंद की पत्नी अर्चना मिलिंद के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय साहित्यकारों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। मनो कामना सिंह, कुमार, अशोक शुभदर्शी और राजेश भोजपुरिया सहित कवियों और लेखकों ने समारोह की शोभा बढ़ाई। अशोक शुभदर्शी ने कार्यक्रम के मेजबान के रूप में कार्य किया।

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