आबकारी कांस्टेबल भर्ती: शारीरिक परीक्षण के दौरान 5 अभ्यर्थियों की मौत
विपक्ष ने मौतों को लेकर हेमंत सोरेन सरकार की आलोचना की, न्यायिक जांच की मांग की
झारखंड में आबकारी सिपाही भर्ती के लिए शारीरिक क्षमता परीक्षण के दौरान हुई दुखद मौतों से विवाद छिड़ गया है।
रांची – झारखंड में आबकारी कांस्टेबल भर्ती के लिए शारीरिक क्षमता परीक्षण के दौरान पांच अभ्यर्थियों की मौत हो गई, जिसके बाद राज्य सरकार की आलोचना हुई।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस दुखद घटना के लिए हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की।
उन्होंने अधिसूचना और शारीरिक दक्षता परीक्षा के बीच की संक्षिप्त अवधि का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए दिए गए कम समय पर सवाल उठाया।
मरांडी ने मांग की, “केवल 15 दिनों में उम्मीदवार दौड़ की तैयारी कैसे करेंगे?” उन्होंने आर्द्र मौसम के दौरान परीक्षा आयोजित करने में सरकार की लापरवाही का आरोप लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भर्ती केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “सरकार ने न तो पीने के पानी की व्यवस्था की है, न ही शौचालय की, न ही महिलाओं के लिए छोटे बच्चों को स्तनपान कराने की कोई व्यवस्था है।”
मरांडी ने मौतों की न्यायिक जांच की मांग की और मृतक उम्मीदवारों के आश्रितों के लिए उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग की।
विपक्ष के नेता अमर कुमार बाउरी ने जल्दबाजी में की गई भर्ती प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि यह बेरोजगार युवाओं और विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव का जवाब है।
बाउरी ने कहा, “राज्य सरकार पांच साल में नौकरियों का वादा पूरा नहीं कर सकी।” उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में की गई प्रक्रिया के कारण दुखद परिणाम सामने आए।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, पलामू में शारीरिक परीक्षण के दौरान बेहोश हुए 25 अभ्यर्थियों में से तीन की इलाज के दौरान मौत हो गई।
मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर.के. रंजन ने मौत का प्रारंभिक कारण सांस फूलना बताया है। उन्होंने कहा, “हमें यह भी संदेह है कि सहनशक्ति बढ़ाने के लिए शामक दवाओं का सेवन किया गया होगा।”
ये मौतें कई जिलों में हुईं: गिरिडीह, रांची और हजारीबाग में एक-एक, तथा पलामू में तीन।
जांच जारी रहने के साथ ही इस घटना ने राज्य में सुरक्षा उपायों और भर्ती प्रक्रियाओं की योजना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
