डॉ. अजय कुमार ने रेलवे सुरक्षा को लेकर सरकार की आलोचना की

पूर्व सांसद डॉ. अजय कुमार ने सार्वजनिक सुरक्षा की उपेक्षा के लिए एनडीए की आलोचना की, रेल दुर्घटनाओं का हवाला दिया

पूर्व सांसद ने रेल मंत्री पर यात्री सुरक्षा की बजाय प्रचार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

जमशेदपुर – पूर्व सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य डॉ. अजय कुमार ने एनडीए सरकार पर तीखा हमला करते हुए रेलवे में सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।

एक सभा में बोलते हुए कुमार ने रेल दुर्घटनाओं को सरकारी लापरवाही का सबूत बताया।

कंचनजंगा और डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की घटनाओं का जिक्र करते हुए कुमार ने कहा, “भारतीय रेलवे को बदलने का प्रधानमंत्री मोदी का 2019 का वादा सबसे खराब तरीके से पूरा हुआ है।”

कांग्रेस नेता ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की आलोचना की और उन्हें सुरक्षा उपायों पर सोशल मीडिया को कथित रूप से प्राथमिकता देने के लिए “रेलवे रील मंत्री” करार दिया।

कुमार ने कहा, “जुलाई 2021 में वैष्णव के पदभार संभालने के बाद से, हमने जवाबदेही की तुलना में अधिक प्रचार स्टंट देखे हैं।”

कुमार ने कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना पर रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें दोषपूर्ण सिग्नल और खराब परिचालन प्रबंधन को प्रमुख कारण बताया गया था।

उन्होंने यात्री सुरक्षा के लिए आवंटित राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष के दुरुपयोग का खुलासा करने वाली 2021 की सीएजी रिपोर्ट का भी हवाला दिया।

कुमार ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए दावा किया, “सुरक्षा सुधारों के लिए निर्धारित धनराशि फुट मसाजर और फर्नीचर जैसी गैर-जरूरी वस्तुओं पर खर्च कर दी गई।”

पूर्व सांसद ने ‘कवच’ टक्कर रोधी प्रणाली के क्रियान्वयन में देरी की आलोचना की तथा इसकी लागत की तुलना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से की।

कुमार ने मोदी सरकार पर लोको पायलटों की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने समाधान का प्रयास किया था।

कुमार ने कहा, “अगस्त 2021 से अब तक ट्रेन दुर्घटनाओं और सुरक्षा मुद्दों के कारण 329 लोगों की जान जा चुकी है।” उन्होंने आगे और अधिक हताहतों को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया।

कांग्रेस नेता के बयानों से भारत में रेलवे सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास के राजनीतिकरण पर बढ़ती चिंताएं उजागर होती हैं।

चूंकि रेल दुर्घटनाएं लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं, इसलिए राष्ट्रीय रेल प्रणाली में इन महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दों पर ध्यान देने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

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