कार जलभराव में डूबी, दो डॉक्टरों की मौत; जीपीएस की गलती?

जीपीएस नेविगेशन त्रुटि से दुर्घटना

सड़क को नदी समझने से हुई दुर्घटना, जांच जारी

आपने पिछले दिनों मीडिया में यह खबर पढ़ी होगी कि केरल में जी. पी. एस. ने कार को जलभराव वाले हिस्से की ओर गुमराह किया, जो वास्तव में एक नदी थी, जिससे कार डूब गई और उसमें बैठे दो डॉक्टरों की मौत हो गई।

दुर्घटना तब हुई जब कार गलती से पानी से भरे हिस्से में प्रवेश कर गई, यह सोचकर कि यह सड़क है। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि दुर्घटना जी. पी. एस. अनुप्रयोग में तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि के कारण हुई थी।

क्या है इसकी सच्चाई ? आइये जानते हैं, लेकिन इससे पहले जीपीएस के बारे में थोड़ी चर्चा।

अगर आप किसी अनजान जगह पर जाते हैं तो आप अपनी लोकेशन को ट्रेक करने के लिए और मंजिल तक पहुंचने के लिए जीपीएस का इस्‍तेमाल जरूर करते होंगे लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है कि आखिर जीपीएस में ऐसा क्‍या होता है जो कुछ ही सेकेण्‍ड में आपकी लोकेशन को ट्रेक कर सकता है इस आलेख में हम आपको बतायेंगे कि आखिर जीपीएस सिस्‍टम क्‍या है, ये किस तरह से काम करता है और इसका इस्‍तेमाल कैसे किया जाता है ।

जीपीएस (GPS) का पूरा नाम Global Positioning System है । जीपीएस आमतौर पर एक Satellite Based Radio Navigation System है जिसका इस्‍तेमाल लोकेशन को जानने के लिए किया जाता है । जैसे अगर आप किसी समस्‍या में फंस गए हैं तो आप Emergency Number के जरिए मदद ले सकते हैं, जो आजकल सभी मोबाइल फोन में होते हैं ।

जीपीएस को सबसे पहली बार अमेरिकी सरकार द्वारा सैन्य उद्देश्य के लिए सन् 1973 में एक प्रोजेक्‍ट के रूप में लॉन्‍च किया गया था । इस प्रोजेक्‍ट के तहत पहला उपग्रह सन् 1978 में लॉन्‍च की गई थी । उस समय जीपीएस का इस्‍तेमाल केवल अमेरिकी मिलिट्री द्वारा ही किया जाता था । इसकी मदद से अमेरिकी मिलिट्री दुश्‍मन देशों के वायुयान और उनकी मिलिट्री पर सटीक निशाना लगाकर मार गिराती थी ।

इसके बाद सन् 1983 में एक फ्लाइट जो रूस की ओर जा रहा था । उस समय हवाईजहाज में जीपीएस सिस्‍टम नहीं हुआ करते थे क्‍योंकि जीपीएस केवल अमेरिकी मिलिट्री के लिए बनाया गया था । इस हवाईजहाज में तकरीबन 269 लोग जा रहे थे । लेकिन ये प्‍लेन गलती से रूस के ऐसे एरिया में चला गया जहां उसे नहीं जाना चाहिए था । मतलब, रूस के प्रतिबंद्धित क्षेत्र में चला गया था जिसे रूस के द्वारा नष्‍ट कर दिया गया था ।

इस घटना के बाद उस समय के अमेरिका के राष्‍ट्रपति रोनाल्ड रेगन ने फैसला किया कि अब जीपीएस को पूरे विश्‍व में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएंगा ।

लेकिन उस समय पूरे विश्‍व के लिए तकरीबन 24 उपग्रह की आवश्‍यकता थी । इसलिए जीपीएस को आम लोगों के लिए उपलब्‍ध कराने के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा पहला उपग्रह 14 फरवरी सन् 1989 को और 24 वां उपग्रह सन् 1994 को लॉन्‍च किया गया था । सन् 1995 में पहली बार जीपीएस को आम लोगों के लिए लिए ओपन किया गया था लेकिन उस वक्‍त इसकी Accuracy और Quality इतनी perfect नहीं थी ।

सन् 2000 तक अमेरिकी सरकार ने जीपीएस को और ज्‍यादा बेहतर बनाने के लिए अनेक प्रयास किए थे । इसके नतीजे स्‍वरूप आज जीपीएस पूरी दुनिया में ठीक तरह से काम करने लगा है ।

जीपीएस काम कैसे करता है

आपके स्‍मार्टफोन या किसी भी जीपीएस यूनिट में एक जीपीएस Receiver होता है जो सैटेलाइट के द्वारा भेजे गए सिग्‍नलों को रिसीव करता है । आपको ये तो पता होगा कि पृथ्‍वी के अंतराल में घूमने वाली सैटेलाइट एक समय के बाद सिग्‍नल भेजती है । इन उपग्रहों में सिग्‍नल और उसका समय पहले से तय होता है।

इन उपग्रहों में समय की सही गणना के लिए Atomic Clock का इस्‍तेमाल किया जाता है । ये ऐसी Clock होती है जो लाखों सालों तक सही समय बता सकती है । इन Clocks के खराब होने की संभावना बहुत कम होती है ।

जब इन उपग्रहों के सिग्‍नल किसी जीपीएस रिसीवर के संपर्क में आते हैं तो रिसीवर उन सिग्‍नलों को री‍ड करता है, इसमें रिसीवर यह भी पता कर लेता है कि सिग्‍नल जिस सैटेलाइट से भेजे गए है वो कितनी दूरी पर स्थित है । अगर आपका डिवाइस चार या उससे ज्‍यादा सैटेलाइट से सिग्‍नल प्राप्‍त करने में सफल हो जाता है तो आपको आपका वर्तमान लोकेशन पता लग जाता है ।

एक सामान्य जीपीएस डिवाइस जिसका इस्‍तेमाल काफी समय से नहीं किया गया है वो भी अपनी लोकेशन को दिखाने में 15 से 20 मिनट का समय लेता है । लेकिन अगर आप अपने स्‍मार्टफोन में जीपीएस का इस्‍तेमाल करते हैं तो आपको आपकी लोकेशन कुछ ही सेकेण्‍ड में पता चल जाती है ।

ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि मोबाइल फोन में A-GPS या Assistant GPS का इस्‍तेमाल किया जाता है । ये भी जीपीएस का ही रूप होता है पर ये इंटरनेट का इस्‍तेमाल करके लोकेशन का जल्‍दी पता लगा लेता है ।

अब सुलझाते हैं केरल के एर्नाकुलम जिले में घटी घटना की पहेली। दरअसल, समस्या उपकरणों/ऐप द्वारा उपयोग किए जाने वाले मानचित्रण सॉफ्टवेयर (mapping software) में है। वह सॉफ्टवेयर निजी क्षेत्र (जैसे, गूगल, एप्पल) से आता है, न कि जी. पी. एस. उपग्रहों से।

जी. पी. एस. उपग्रह केवल प्रकाशस्तंभों की तरह संकेत होते हैं, जिनका उपयोग एक उपकरण अपने स्वयं के अक्षांश और देशांतर की गणना करने के लिए करता है। उपग्रह किसी भी मानचित्रण जानकारी को प्रसारित नहीं करते हैं।

भारत में जीपीएस की परिस्थिति

आज के समय में जीपीएस के अलावा Glonass ही ऐसा नेविगेशन सिस्‍टम है जो वर्ल्‍डवाइड अपनी सेवाएं प्रदान करता है । अब तो भारत ने भी अपना नेविगेशन सिस्‍टम बना लिया गया है ।

अभी ये सिस्‍टम भारत में ही उपलब्‍ध है और ये बॉर्डर एरिया से 1500 किलोमीटर एरिया तक कवरेज दे सकता है । आने वाले समय में भारत भी अपने नेविगेशन को मजबूत बनाने के लिए बहुत से प्रोजेक्‍टों पर काम कर रहा है ।

जीपीएस नेविगेशन त्रुटि से दुर्घटना
जीपीएस नेविगेशन त्रुटि से दुर्घटना

Join Our Newsletter

यह भी पढ़ें

चांडिल में हाथियों के हमले से बुजुर्ग की मौत

चांडिल के कुकडू क्षेत्र में हाथियों के हमले में एक बुजुर्ग की मौत हुई, जिससे ग्रामीणों में डर और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई है।

एग्रीको में तेज रफ्तार कार का कहर, टीस्को क्वार्टर की दीवार तोड़ घर में घुसी

जमशेदपुर के एग्रीको इलाके में तेज रफ्तार कार दीवार तोड़कर घर में घुस गई, हालांकि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई और पुलिस जांच में जुटी है।

अभिमत

ज़िद

ज़िद है आगे बढ़ने की,सबको पीछे छोड़करनया इतिहास गढ़ने की। ज़िद है मज़बूत बनने की,हर मुश्किल का सामना करने की,गिरकर भी हौसला बनाए रखने की। ज़िद...

जमशेदपुर में विंटर फेस्ट के तहत “जैम एट स्ट्रीट” बना आकर्षण का केंद्र, कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही बटोरी

जमशेदपुर : जमशेदपुर के विंटर फेस्ट के तहत "जैम एट स्ट्रीट" (Jam@Street) एक बड़ा आकर्षण बना, जहाँ बिस्टुपुर की सड़कों पर संगीत, नृत्य, योग,...

संपादक की पसंद

बिहार के अररिया में विवाद के बाद ड्राइवर की बेरहमी से हत्या, आरोपी को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला

अररिया : बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक मामूली विवाद ने भयावह रूप ले लिया। कृषि उत्पादन बाजार...

जमशेदपुर फायरिंग कांड में घायल युवक की मौत

जमशेदपुर के सीतारामडेरा में फायरिंग और चापड़ हमले में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद टीएमएच में परिजनों ने हंगामा किया।

Feel like reacting? Express your views here!

यह भी

आपकी राय

अन्य समाचार व अभिमत