चक्रधरपुर में मासंत महोत्सव के दौरान छऊ नृत्य का आयोजन
विधायक सुखराम उरांव ने नलिता और बांझी कुसुम में जीवंत छऊ नृत्य कार्यक्रम में भाग लिया
चक्रधरपुर में मासंत महोत्सव में छऊ नृत्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसमें विधायक सुखराम उरांव ने झारखंड की समृद्ध लोक कला की प्रशंसा की।
चक्रधरपुर – चक्रधरपुर विधानसभा में मासंत पर्व पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, ग्रामीण क्षेत्रों में छऊ नृत्य की धूम रही।
चक्रधरपुर विधानसभा में मासंत महोत्सव में कई दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही।
ग्रामीण गांवों में विशेष रूप से छऊ नृत्य उत्सव मनाया जाता है।
शनिवार को चक्रधरपुर एवं बंदगांव प्रखंड के विभिन्न गांवों में छऊ नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए गए।
विधायक सुखराम उरांव ने नलिता एवं बांझी कुसुम गांव में आयोजित छऊ नृत्य महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
नृत्य मंडली ने आयोजन समिति की ओर से विधायक उरांव का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किया।
अपने भाषण में विधायक उरांव ने झारखंड की लोक कला, विशेषकर छऊ नृत्य के महत्व पर जोर दिया, जिसकी जड़ें सरायकेला में हैं।
विधायक उरांव ने कहा, “झारखंड की लोक कला को आज किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। सरायकेला से शुरू हुआ छऊ नृत्य अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो चुका है।”
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि विदेशों से लोग सरायकेला और आसपास के जिलों में गुरुओं से छऊ सीखने आते हैं।
कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए विधायक उरांव ने उनसे आगे भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन जारी रखने का आग्रह किया।
नलिता गांव में दो नृत्य मंडलियों ने रात भर विभिन्न प्रकार के छऊ नृत्य प्रस्तुत किये।
इस कार्यक्रम में आयोजन समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने भाग लिया।
उपस्थित लोगों में रघुवीर मुंडा, रेलसिंह कुम्हार, अजय गोप, रोहित मुंडा, आकाश कुम्हार, नटवर मुंडा, शत्रुघ्न मुंडा, अदेर मुंडा, महेश मुंडा, श्रीसंत गोप, सतीश समाड और राजेश मुंडा शामिल थे।
बांझी कुसुम गांव में कार्यक्रम में मनारंजन बोदरा, मानकी जोंको, बबलू जोंको, किशोर बोयपाई, सुंदर बोदरा, सुकरा गोप, कुंवर सिंह बोदरा, राजा चंपिया, अमित जोंको, थॉमस चंपिया, बबलू जोको सुनिया सुंबुरुई, बलभद्र सुब्रुई, भूषण मांझी, मनोज मेलगांडी, अमर सिंह बोदरा, विनय प्रधान आदि उपस्थित थे।
छऊ नृत्य महोत्सव ने झारखंड की जीवंत सांस्कृतिक विरासत और उसके कलाकारों के समर्पण को उजागर किया।
