CIRD Bhoomanand Tirth: प्रख्यात संत स्वामी भूमानंद तीर्थ जी महाराज जमशेदपुर पहुंचे, सर्किट हाउस क्षेत्र के सीआईआरडी में गुर पाद पूजा
जमशेदपुर: प्रख्यात संत स्वामी भूमानंद तीर्थ जी महाराज और मां गुरुप्रिया का जमशेदपुर में आगमन हो चुका है. उनका प्रवास सर्किट हाउस क्षेत्र में स्थित आत्मीय वैभव विकास केंद्र यानी सीआईआरडी सोनारी प्रचार में हो रहा है.
दक्षिण भारत के केरल के त्रिचूर जिले में स्थित आश्रम से स्वामी जी जमशेदपुर 57 वां वार्षिक ज्ञान यज्ञ मैं शामिल होने जमशेदपुर पधारे हैं उन्हीं के मुख्य आचार्यत्व में यह आयोजन संपन्न होगा.
इस क्रम में शुक्रवार की संध्या को सीआईआरडी परिसर में सदगुरु भूमानंद तीर्थ की पूजा की गयी. परंपरानुसार उनके आगमन पर यह पूजा हुई.
कोरोना काल के कारण तीन वर्ष बाद स्वामी भूमानंद तीर्थ जी जमशेदपुर आये हैं. इसलिए भक्तों में काफी उत्साह था.
सीआईआरडी से जुड़े प्रोफ़ेसर एसआर साहू ने बताया कि स्वामी जी के आगमन पर ज्ञान गंगा की वर्षा होती है. गुरु द्वारा प्रदत्त ज्ञान हमारे जीवन का अभेद्य कवच होगा. सभी भक्तों की तरफ से सुजीत और आराधना ने पाद पूजा की. वैदिक मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के साथ पूजा की गयी. गुरु स्तुति हुई.
स्वामिनी मां गुरुप्रिया ने पाद पूजा के बारे में बताया कि हम गुरु की आराधना निष्कट मन से हृदय खोलकर करते हैं. राग-द्वेष रहित मन ही निर्मल मन होता है. उन्होंने सदगुरु के 108 नामों का उच्चारण किया. स्वामी भूमानंद तीर्थ जी महाराज ने सभी को आशीर्वचन दिये. कहा कि भगवान के नाम का आश्रय लेने से कल्याण होगा. स्वामी भूमानंद तीर्थ जी महाराज का प्रवचन 27 फरवरी से चार मार्च तक होगा.इस ज्ञान यज्ञ का समापन 10 मार्च को होगा.
स्वामी भूमानंद तीर्थ के प्रवचन की शुरूआत 27 फरवरी से शाम 7 बजे से 8 बजे तक होगी और यह सिलसिला 4 मार्च तक लगातार
चलता रहेगा. इसके बाद 28 फरवरी से 2 मार्च तक मां गुरूप्रिया का साधना सत्संग (हिंदी में) रोजाना सुबह 10.30 से 11.45 बजे तक होगा. 6 से 8 मार्च तक मां गुरूप्रिया का दैनिक जीवन में भगवद्गीता पर अंग्रेजी में उद्बोधन होगा. 9 मार्च को शाम 7 बजे से 8.15 बजे तक समापन सत्संग होगा.
अन्य कार्यक्रम
केंद्र में 26 फरवरी को सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक गरीबों को चादर और कंबल का वितरण स्वामीजी और उनके शिष्य अपने हाथों से करेंगे.
उल्लेखनीय है कि स्वामी भूमानंद तीर्थ के अधिकांश कार्यक्रम आत्मीय वैभव विकास केंद्र में होंगे, हालांकि कुछ कार्यक्रम दूसरी जगह पर भी होंगे.
जानिए स्वामी भूमानंद तीर्थ के
स्वामी भूमानंद तीर्थ नारायण आश्रम तपोवनम और आत्मीय वैभव विकास केंद्र के संस्थापक हैं. वे आदि शंकराचार्य की तीर्थ परंपरा से जुड़े हैं. पश्चिम बंगाल के दक्षिण खंड के बाबा गंगाधर परमहंस से उन्होंने ब्रह्मविद्या की दीक्षा ली. कुछ सालों की साधना के बाद 23 साल की उम्र में उन्होंने संन्यास ले लिया. स्वामीजी क जन्म एक ब्राह्मण परिवार में केरल के त्रिशूर जिले के पारालिक्कड़ गांव में हुआ जो आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली कालडी के निकट है, उनकी माता धार्मिक स्वभाव की गृहिणी थी जिन्होंने अपने बच्चों को धार्मिक संस्कार दिए. संस्कृत के कई श्लोक उन्हें माता ने सिखाए जो अनपढ़ भले थी, लेकिन धार्मिक संस्कार उनमें कूट-कूटकर भरे थे. युवा अवस्था में ही स्वामीजी मंदिर जाते थे और सूर्य नमस्कार करते थे. उनकी मुलाकात जब गंगाधर परमहंस से हुई तो उनकी जीवन धारा ही बदल गई.

