सरायकेला खरसावां जिले के टायो कालोनी निवासी आयुष कुमार यूपीएससी में 143वीं रैंक लाकर बना आईपीएस, सूचना मिलते ही समस्तीपुर में खुशी की लहर

ग़म्हरिया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है. इस परीक्षा में बिहार के कई उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया है। जमशेदपुर के टायो कालोनी का आयुष कुमार यूपीएससी में 143 रैंक लाकर आईपीएस बन गया है। उन्होंने पहले प्रयास में ही यह सफलता हासिल की है। शुक्रवार को यूपीएससी का रिजल्ट जारी होने के बाद आयुष को मिली इस सफलता से उनके परिजनों समेत क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है।

बताया गया कि रैंक के अनुसार आयुष को आईएएस मिलना तय है। किंतु उनकी इच्छा आईपीएस बनने की है। बताया गया कि टायो कंपनी के कर्मचारी प्रदीप कुमार के पुत्र आयुष की स्कूली शिक्षा कॉलोनी परिसर स्थित विद्या ज्योति स्कूल में हुई है।

यहां से दसवीं परीक्षा पास करने के उपरांत बिस्टुपुर के चिन्मया विद्यालय से उन्होंने प्लस टू की परीक्षा पास की। वहां से उन्होंने बिलासपुर के गुरुघासी विश्वविद्यालय से 2023 में इंजीनियरिंग डिजाइन में बीटेक किया। उसके बाद बंगलौर में प्रोडक्ट डिजाइनर के पद पर कार्य करते हुए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। बताया गया कि महज दो साल की तैयारी में ही उन्होंने इस बड़ी सफलता को हासिल कर ली।

बताया गया कि टायो कंपनी के बंद हो जाने से आयुष के पिता प्रदीप कुमार को अपने बच्चों को पढ़ाने में काफी परेशानी हुई। किंतु उन्होंने हिम्मत नहीं हारते हुए अपने बच्चों को बेहतर तालीम देने का फैसला लिया।

प्रदीप कुमार अभी दुर्गापुर में कार्यरत है। वह मूलरूप से बिहार के समस्तीपुर के मालती गांव के रहने वाले हैं। वर्तमान में टायो कालोनी के एच 40 में उनका निवास है, जहां पत्नी रहती है।

बताता गया कि आयुष दो भाई बहन हैं। आयुष की बड़ी बहन भानजा भी बीटेक इंजीनियर है। वह कोलकाता में टीसीएस में कार्यरत है। माता कुमारी रेणुका गृहिणी है। पिता प्रदीप कुमार ने बताया कि आयुष अभी बंगलौर में है।

वह एक दो दिन में ग़म्हरिया पहुंचने की संभावना है। उन्होंने बताया कि परिवार में उनके चार सदस्य है, जो अलग अलग स्थान पर हैं। इसलिए इस बड़े उत्सव को एक साथ नहीं सेलिब्रेट कर पा रहे हैं। बताया कि शुक्रवार की सुबह ही वे दुर्गापुर पहुंचे हैं। यहाँ आने के बाद रिजल्ट निकलने पर यह खुशी मिली।

आयुष की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की माटी में कुछ तो है। मंजिल पाने का जुूनून अब भी बरकरार है। इसी जुनून का नतीजा है कि की आयुष ने सफलता हासिल की है।

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