अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए सुप्रीम लीडर खामेनेई, ईरान में 40 दिनों के शोक का एलान

तेहरान ।अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर इसकी घोषणा की है। इसके पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अधिकारियों ने भी खामेनेई की मौत का दावा किया था। रविवार सुबह ईरान के सरकारी मीडिया ने भी खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है। ईरान के सरकारी टीवी ने कहा कि सुप्रीम लीडर खामेनेई शहीद हो गए हैं।

ईरान के मौलवी राज वाले सिस्टम ने चार दशक से ज्यादा समय तक देश पर राज किया है। ऐसे में खामेनेई की मौत के बाद इस्लामिक शासन में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा और यह व्यवस्था कितना चल पाएगी यह सवाल बना हुआ है। ईरान के संविधान के अनुसार, विलायत-ए-फकीह के सिद्धांत के तहत देश का सुप्रीम लीडर एक मौलवी को होना चाहिए।

इस्लामिक रिपब्लिक ईरान में सु्प्रीम लीडर का फैसला आखिरी होता है, जिसे कोई चुनौती नहीं दे सकता। खामेनेई और उनके पहले अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी के राज में इसी व्यवस्था पर देश का शासन चलता रहा, लेकिन खामेनेई की कथित मौत ने सिस्टम को हिला दिया है।

खामेनेई की जगह कौन लेगा?

खामेनेई का शासन उनकी करीबी सलाहकारों के जरिए रहा है, जिसे गार्डियन काउंसिल कहा जाता है। हालांकि, शनिवार के हमलों के बाद यह साफ नहीं है कि उनमें से कितने लोग बचे हैं। 86 साल के खामेनेई ने कभी भी अपने वारिस के नाम का सार्वजनिक ऐलान नहीं किया है। अभी यह साफ नहीं है कि उनकी मौत की पुष्टि होती है तो उनकी जगह कौन लेगा। इसके पहले संभावित उम्मीदवारों में खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम मजबूती से सामने आता था।

इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक रूबोल्लाह खुमैनी के पोते हसन खुमैनी और दूसरे मौलवियों का भी जिक्र दावेदारों के रूप में होता है। खामेनेई के उत्तराधिकारी का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सीनियर मौलवियों की गार्डियन काउंसिल पर कंट्रोल के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

हमलों से पहले अमेरिकी एजेंसी CIA ने अनुमान लगाया कि खामेनेई की मौत के बाद IRGC के कट्टरपंथी लोग उनकी जगह ले सकते हैं। ईरान के मौलवी लोगों का ताकतवर संस्थानों पर कंट्रोल है। इसके सेंटर में एक्सपर्ट की असेंबली है, जिसका काम सुप्रीम लीडर को नियुक्त करना है। इसमें 88 मौलवी शामिल होते हैं। असेंबली के उम्मीदवारों को गार्डियन काउंसिल मंजूरी देती है, जिसके सदस्यों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से सुप्रीम लीडर चुनते हैं।

उत्तराधिकार का कोई भी फैसला इस्लामिक रिपब्लिक के सबसे सीनियर पॉवर ब्रोकर्स लेंगे, जिसके बाद एसेंबली उसे मंजूरी देगी। हालांकि, गार्डियन काउंसिल इस प्रक्रिया को वीटो कर सकती है। इस काउंसिल के आधे सदस्यों को सुप्रीम लीडर और आधे को न्यायपालिका के प्रमुख नियुक्त करते हैं। काउंसिल कैंडिडेट को डिसक्वालिफाई कर सकती है।

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