शहर के गदरा में आनंद मार्ग प्रचारक संघ ने 3 घंटे का “बाबा नाम केवलम् “अखंड कीर्तन का किया आयोजन
जमशेदपुर : आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंद मार्ग जागृति गदरा में नीलकंठ दिवस मनाया गया। इस अवसर पर 3 घंटे का “बाबा नाम केवलम् “अखंड कीर्तन का आयोजन किया गया।
14 फरवरी को ही 1973 में आनंद मार्ग के संस्थापक गुरु श्री श्री आनंदमूर्ति जी को बिहार के पटना बांकीपुर सेंट्रल जेल में इंदिरा की तानाशाही कांग्रेस सरकार के द्वारा चिकित्सा के नाम पर दवा के रूप में जहर दिया गया था। इसका असर पूरे शरीर पर प्रकृति के अनुकूल पड़ा श्री श्री आनंदमूर्ति जी का शरीर सिकुड़ गया। आंखों की रोशनी चली गई। सिर के बाल उड़ गए। सभी दांत झड़ गए, उसके बावजूद भी गुरु श्री श्री आनंद मूर्ति जी जीवित रहे।
आज के दिन आनंद मार्गी पूरे विश्व में नीलकंठ दिवस के रूप में मनाते हैं। इस ऐतिहासिक दिन के अवसर पर आनंद मार्ग के संस्थापक के जीवन के विषय में चर्चा करते हुए आनंद मार्ग के केंद्रीय महासचिव आचार्य प्रणवेशानंद अवधूत ने कहा कि श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने विष का पान कर दुनिया को यह बत दिया कि दुनिया मे बड़ी से बड़ी मुसीबत आए उसका का सामना हर नैतिकवान पुरुष को करना होगा।
मैदान छोड़कर भागना नहीं होगा। मुसीबत को उपहार के रूप में स्वीकार करना होगा तभी मनुष्य अपने जीवन में बड़ा से बड़ा कार्य कर सकता है।

सुख और दुख दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जहां सुख है वहां दुख भी है। केवल सुख रहने से ही जीवन का अनुभव कभी नहीं हो सकता। दुख का आना भी मनुष्य के जीवन में जरूरी है क्योंकि इससे मनुष्य को तथा आने वाली पीढ़ी को मुसीबत का सामना कैसे किया जाए सीखने का मौका मिलता है।
इस अवसर पर जागृति में लगभग 300 नारायणो को भोजन कराया गया ,100 फलदार वृक्ष का वितरण एवं 100 साड़ी एवं धोती का वितरण किया गया।
