सरकारी बजट में दिव्यांगजनों के लिए समावेशी विकास की ठोस मांग

हमारा मानना है कि जिस प्रकार देश में हर क्षेत्र में निरंतर विकास हो रहा है, उसी प्रकार दिव्यांगजनों के जीवन को भी सुविधाजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है। दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें समान अवसर प्रदान करना सरकार की नैतिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी है।

इस संदर्भ में सरकार से यह माँग की जाती है कि आगामी आम बजट में दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रावधान किए जाएँ—

दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर योजना शुरू की जाए, ताकि वे बिना किसी परनिर्भरता के शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक गतिविधियों में भाग ले सकें।

हर सार्वजनिक स्थान पर रैम्प की व्यवस्था अनिवार्य की जाए, जिससे दिव्यांगजनों की आवाजाही सुगम और सुरक्षित हो सके।

सभी सार्वजनिक शौचालयों को दिव्यांग-अनुकूल बनाकर उनका आधुनिकीकरण किया जाए, ताकि स्वच्छता और सुविधा से जुड़ी किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो।

सार्वजनिक भवनों, सरकारी संस्थानों और परिवहन व्यवस्था को पूर्णतः बैरियर-फ्री (Barrier Free) बनाया जाए।

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार से जुड़ी दिव्यांग-कल्याण योजनाओं के लिए बजट में पर्याप्त वृद्धि की जाए।

दिव्यांगजनों को सहानुभूति नहीं, बल्कि सुविधा, सम्मान और समान अवसर की आवश्यकता है। समावेशी बजट ही सच्चे विकास की पहचान है। आशा है कि सरकार दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए ठोस और प्रभावी निर्णय लेगी।

सुदीप्ता दास

सहायक प्राध्यापक

वाणिज्य विभाग

ग्रेजुएट कॉलेज, जमशेदपुर

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