मोदी-पुतिन शिखर वार्ता में प्रवासन, स्वास्थ्य और पोर्ट सहयोग पर बड़े फैसले

नई दिल्ली ।भारत और रूस के बीच हुई उच्च स्तरीय शिखर वार्ता ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में नई ऊर्जा भर दी है। बैठक के बाद दोनों देशों ने प्रवासन और आसान आवाजाही, स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा, और बंदरगाह तथा पोत परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन करारों को द्विपक्षीय सहयोग की नई दिशा और नई गहराई के रूप में देखा जा रहा है।

वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और रूस ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं के रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। प्रवासन और मोबिलिटी पर हुआ करार दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही और रोजगार अवसरों को आसान बनाएगा। इसी तरह स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग से वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी। बंदरगाह और पोत परिवहन क्षेत्र में हुए समझौते से समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक दक्षता और व्यापारिक गति को नई दिशा मिलेगी।

आठ दशक की स्थिर मित्रता का नया अध्याय : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और रूस की मित्रता पिछले आठ दशकों से ध्रुव तारे की तरह अडिग रही है। यह रिश्ता आपसी सम्मान, गहरे विश्वास और समय की कसौटी पर खरे उतरे सहयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के संबंध कई ऐतिहासिक पड़ावों से गुजर रहे हैं।

एफटीए पर तेजी और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई : मोदी ने बताया कि भारत और रूस यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को शीघ्र पूरा करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह समझौता होने पर दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में बड़ा विस्तार होगा और आर्थिक साझेदारी नई ऊंचाई तक पहुंचेगी।

100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वार्ता के दौरान कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर तक ले जाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूस भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को व्यापक और संतुलित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुतिन ने यह भी आश्वासन दिया कि रूस भारत को ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए तैयार है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

यूक्रेन संकट पर भारत की शांति की नीति दोहराई : प्रधानमंत्री मोदी ने रूस को यह भी आश्वस्त किया कि भारत शुरू से ही यूक्रेन मसले पर संवाद और शांति का समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि भारत यूक्रेन में शांति स्थापना के लिए अपना योगदान देने को तैयार रहा है और आगे भी यही भूमिका निभाएगा।

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