जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर स्थित बिरसानगर थाना क्षेत्र स्थित आल्मंड ब्लॉक के आस्था ट्वीन सिटी में एक महिला बरखा अग्रवाल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। गुरुवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मृतका के शव का पोस्टमार्टम किया गया। उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
बरखा अग्रवाल के भाई वरुण ने बताया कि बरखा की शादी मुकेश अग्रवाल के साथ वर्ष 2010 में हुई थ्ज्ञी।पुलिस ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है. प्राप्त जानकारी अनुसार मृत महिला बर्खा अग्रवाल की शादी 2010 में मुकेश अग्रवाल से हुई थी। मुकेश पिछले तीन साल से सिंगापुर में काम कर रहे हैं। हाल ही में छुट्टी पर जमशेदपुर आए थे।
उन्होेंने बताया कि बुधवार की रात बरखा के पति मुकेश, जेठ और उसकी सास उनके घर घाटशिला आए थे। उसी दौरान बरखा ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जब उसका बेटा कमरे में देखा तो पड़ोस के एक व्यक्ति को बुलाया। उसके बाद उसे मर्सी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे उसे मृत घोषित कर दिया।
उसके बाद फ्लैट के कुछ लोगों ने फोन पर घटना की सूचना दी। जब वे लोग मसी अस्पताल पहुंचे तो देखा कि उसका शव रखा हुआ है और ससुराल पक्ष का वहां कोई नहीं है।
पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। वैसे वह अपने दो बच्चों के साथ जमशेदपुर में अकेले रहती थी। मायके पक्ष वालों का आरोप है कि उनकी बेटी ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की है। उसके साथ कुछ अनहोनी हुआ है, जिसे ये लोग बता नहीं रहे हैं। फिलहाल इस मामले में कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। बरखा के ससुराल वाले दो बिल्डिंग छोड़कर पास में ही रहते हैं। वहीं बरखा के पति से आत्महत्या का कारण पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
मां ने स्कूल भेजना चाहा, बच्ची ने डोबो पुल से नदी में लगा दी छलांग
जमशेदपुर : सोनारी डोबो पुल पर उस वक्त प्रत्यक्षदर्शी हैरान रह गए, जब 13 साल की बच्ची ने नदी में छलांग लगा दी। उस समय नदी में कुछ लोग नहा रहे थे। बच्ची के नदी में गिरते ही लोगों ने उसे बाहर निकाला। घटना गुरुवार सुबह 10 बजे की है।
सूचना मिलते ही घटना स्थल पर पुलिस पहुंची। जब बच्ची से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह स्कूल नहीं जाना चाहती है। स्कूल में उसका मन नहीं लगता है लेकिन मां स्कूल भेजने की जिद कर रही है। गुस्से में आकर उसने छलांग लगा दी। उसके पिता का पूर्व में निधन हो चुका है और वह घर नहीं जाना चाहती है। मां और अन्य लोगों ने समझाने केे बाद भी वह नहीं मानी। आखिरकार उसे सीडब्लयूसी को सौंप दिया गया। वहां से उसे वन स्टॉप सेंटर भेजा गया। शाम में बच्ची ने अपने घर जाने की इच्छा जताई। बाद में सीब्ल्यूसी की टीम ने बच्ची को उसकी मां को सौंप दिया।
