जमशेदपुर के तुरामडीह स्थित नांदूप गांव में उस समय माहौल गर्म हो गया जब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा विस्थापित और प्रभावित ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे। इस दौरान पारंपरिक ग्रामसभा के सदस्यों ने उनका विरोध करते हुए उन्हें और उनके समर्थकों को यूसील प्रबंधन का दलाल बताया और पुतला दहन किया।
दूसरी ओर अर्जुन मुंडा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे विस्थापित परिवारों के अधिकारों और रोजगार की लड़ाई लड़ रहे हैं। ग्रामीणों की मांगों, यूसील प्रबंधन की भूमिका और पूरे विवाद की सच्चाई क्या है? देखिए यह विशेष रिपोर्ट।
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