रांची के सिरमटोली में प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूजा-अर्चना कर झारखण्ड वासियों की सुख-समृद्धि की कामना की
रांची : प्रकृति पर्व ‘सरहुल’ के अवसर पर रांची के ऐतिहासिक सिरमटोली में आयोजित पूजा महोत्सव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर समस्त झारखण्ड वासियों की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

सरहुल का महत्व
सरहुल झारखंड का प्रमुख आदिवासी पर्व है, जो वसंत ऋतु में सखुआ (साल) के फूलों के खिलने पर प्रकृति के प्रति आभार और सम्मान के रूप में मनाया जाता है। यह प्रकृति पूजा, आदिवासी नववर्ष की शुरुआत और धरती-सूर्य के मिलन का प्रतीक है। इस उत्सव में साल वृक्ष की पूजा, पारम्परिक नृत्य, और नई फसल की खुशी में सामूहिक भोज का विशेष महत्व है।
यह पर्व चैत्र महीने के तीसरे दिन चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। यह नए साल की शुरुआत की निशानी है। हालांकि इस त्योहार की कोई निश्चित तारीख नहीं होती क्योंकि विभिन्न गांवों में इसे अलग-अलग तिथियों में मनाते हैं।
