विश्व कल्याण आश्रम में शांकराचार्य के सानिध्य में संपन्न हुआ सामूहिक विवाह, परिणय सूत्र में बंधे 10 जोड़े

आनंदपुर / मनोहरपुर : विश्व कल्याण आश्रम में गुरुवार को परमपूज्य पश्चिमाम्नाय द्वारिका शारदापिठाधिश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य मे सामूहिक विवाह संस्कार संपन्न किया गया।

इस दौरान नव दंपति ने शंकराचार्य स्वामी का सामूहिक रूप से पादुका पूजन किया और स्वामी जी का आशीर्वाद लिया। शंकराचार्य स्वामी ने कहा कि श्रृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी ने मनुष्य शरीर बनाया और अति प्रसन्न हुए।

मनुष्य ही धर्म का पालन कर सकता है। रिश्तों को पहचान सकता है और मर्यादा बनाये रख सकता है।स्वामी जी ने कहा कि सनातन धर्म में 16 संस्कार होते हैं।इसमें विवाह संस्कार प्रमुख है।

इस संस्कार के बाद ही पारिवारिक जीवन शुरू होता है। इस दौरान दस जोड़ो का सनातन रीति रिवाज़ से सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। जहां मौजूद नव दम्पतियों को शंकराचार्य द्वारा आशीर्वाद दिया गया।

मौके पर नवविवाहित जोड़े को विश्व कल्याण आश्रम द्वारा वर व वधु के लिए वस्त्र, श्रृंगार पेटी, अलमीरा, पलंग, गद्दा, डिनर सेट, अंगूठी, मंगलसूत्र दिया गया।विवाह समारोह का दौरान वर, वधु पक्ष के परिजन, समारोह में आये श्रद्धालुओं के लिए नाश्ता व भोजन का प्रबंध आश्रम परिसर में किया गया।

नवविवाहित जोड़े :

1.संदीप सिंह, जलडेगा (सिमडेगा) आरती कुमारी, बुरुकसाई, आनंदपुर

2.देवनारायण सिंह, हाटिंगहोड़े, बानो

मीना कुमारी, बाहदा, आनंदपुर

3.हरीश सिंह, केतुंगा, लचरागढ़

आरुणि कुमारी, लताकेल, बानो

4.चट्टान सिंह, घाघरा, मनोहरपुर

पद्मा गुड़िया, सागजोड़ी, मनोहरपुर

5.मदनलाल महतो, सलडेगा, सिमडेगा

मलिका कुमारी, कामडरा (गुमला)

6.रतन मुंडा, तमाड़ (रांची)

लखीमनी कुमारी, रुंघीकोचा, आनंदपुर

7.तारकेश्वर सिंह, बरसलोया, लचरागढ़

दुर्गा कुमारी, बानो

8 रामचंद्र बड़ाइक़, रुंघीकोचा, आनंदपुर

सीता बड़ाइक़, बेड़ातुलूंडा, आनंदपुर

9.कृष्णा लकड़ा, रेंगालबेड़ा, मनोहरपुर

अलीशा किस्पोट्टा, उरकिया, मनोहरपुर

10.राजा बाबू रजक, मनोहरपुर

प्रिया दास, भालुडुंगरी, आनंदपुर

विश्व कल्याण आश्रम : निराश्रितों को आश्रय और वंचितों को सहायता

झारखंड के चाईबासा के समीप विश्व कल्याण आश्रम एक आध्यात्मिक और सामाजिक संस्था है। आरम आदिवासियों के उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य और धर्म-संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्यरत है। द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी के मार्गदर्शन में यहाँ धार्मिक अनुष्ठान, छऊ नृत्य और सेवा कार्य होते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य निराश्रितों को आश्रय और वंचितों को सहायता प्रदान करना है।

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