नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सोमवार को कथित ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में खुद को निर्दोष बताया। राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश होकर दोनों नेताओं ने भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों से इनकार किया और कहा कि वे मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं।
यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा रेलवे में जमीन के बदले नौकरी देने के कथित आरोपों से जुड़ा है। इससे पहले निचली अदालत ने राजद नेताओं लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को आरोप तय करने की प्रक्रिया के तहत 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच अदालत में पेश होने की अनुमति दी थी। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई शुरू करने के लिए 9 मार्च की तारीख तय की है।
जनवरी में विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने आरोप तय करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपी एक आपराधिक साजिश के तहत काम कर रहे थे। अदालत के अनुसार, आरोपपत्र में उल्लेख है कि रेलवे में सार्वजनिक नौकरियों के बदले अचल संपत्तियों के अधिग्रहण का कथित तौर पर सौदा किया गया।
अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार की रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए इसे “पूरी तरह अनुचित” बताया। मामले में कुल 98 जीवित आरोपियों में से 46 के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, जबकि 52 को बरी कर दिया गया है। पांच आरोपियों की मृत्यु के बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।
यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। सीबीआई के मुताबिक, आरोप है कि लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी एक कंपनी के नाम पर बाजार मूल्य से कम दर पर जमीन ली गई और बदले में रेलवे में नौकरियां दी गईं।
इधर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी पटना में भूमि हस्तांतरण से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहा है।
