थोड़ी रिकवरी की कोशिशों के बावजूद रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर, 41 पैसे गिरा, एक डॉलर की कीमत 91.99 रुपये
विदेशी निवेश की निकासी, वैश्विक अनिश्चितताओं व कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निकट भविष्य में बना रह सकता रुपये पर दबाव
नई दिल्ली : थोड़ी रिकवरी की कोशिशों के बावजूद रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर है रुपया। विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपये में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे टूटकर 91.99 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा की लगातार निकासी और वैश्विक स्तर पर बनी अस्थिर भू-राजनीतिक स्थिति के चलते घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।
अंतर बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 91.45 पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसने 91.41 का उच्च स्तर भी छुआ, लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में फिसलते हुए यह रिकॉर्ड निचले स्तर 91.99 पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को रुपया सात पैसे की मजबूती के साथ 91.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार आरबीआई के हस्तक्षेप से बाजार में उतार-चढ़ाव मामूली कह सकते हैं कि नियंत्रित जरूर हो रहा है, लेकिन रुपये का समग्र रुख अब भी नकारात्मक बना हुआ है।
इस बीच, छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 98.38 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 1.09 प्रतिशत बढ़कर 64.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जिससे भी रुपये पर दबाव बढ़ा।
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 797.94 अंक टूटकर 81,509.43 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 240.55 अंक गिरकर 25,049.35 अंक पर कारोबार करता नजर आया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) गुरुवार को बिकवाल रहे और उन्होंने शुद्ध रूप से 2,549.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेश की निकासी के चलते निकट भविष्य में रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
