जमशेदपुर भाजपा में ‘ताजपोशी’ की बिसात तैयार: संजीव सिन्हा की दावेदारी सबसे प्रबल, नामांकन की औपचारिकता शेष
जमशेदपुर: लंबे समय से जारी खींचतान और सस्पेंस के बाद आखिरकार भाजपा जमशेदपुर महानगर के जिलाध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। पार्टी ने इस बार परंपरा से हटकर ‘नामांकन’ का रास्ता चुना है, जिसके लिए प्रदेश नेतृत्व ने दो कद्दावर नेताओं को जमशेदपुर भेजने का फरमान जारी कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सारी बिसात बिछ चुकी है और संजीव सिन्हा का नाम लगभग तय हो चुका है।
सर्किट हाउस में जमावड़ा, प्रदेश से आ रहे दो बड़े चेहरे
जिलाध्यक्ष की चयन प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह और पर्यवेक्षक विरंची नारायण एक-दो दिनों के भीतर लौहनगरी पहुंचेंगे। उनके ठहरने के लिए सर्किट हाउस में विशेष इंतजाम किए गए हैं। मनोज सिंह ने पुष्टि की है कि वे वर्तमान में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बैठक में व्यस्त हैं, वहां से सीधे जमशेदपुर का रुख करेंगे।
रायशुमारी में पिछड़ने के बाद भी सिन्हा की ‘लॉटरी’!
पार्टी के भीतर इस बार की प्रक्रिया ने सबको चौंका दिया है। सूत्रों की मानें तो:
पुराने आंकड़े: रायशुमारी में वर्तमान जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा नंबर एक पर थे, जबकि अमित अग्रवाल दूसरे और संजीव सिन्हा तीसरे पायदान पर बताए जा रहे थे।
नया मोड: प्रदेश स्तर के दो शीर्ष नेताओं के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के कारण मामला दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) तक पहुंचा।
बदला समीकरण: अब चर्चा है कि केवल संजीव सिन्हा ही नामांकन दाखिल करेंगे, जिससे उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है।
सवालिया निशान: पार्टी के अंदर यह चर्चा तेज है कि जब फैसला नामांकन से ही होना था, तो पहले रायशुमारी का ‘शक्ति प्रदर्शन’ क्यों कराया गया?
विरोध की सुगबुगाहट, पर निर्णय अटल
हालांकि पार्टी के अंदर एक धड़ा इस नई नामांकन परंपरा और रायशुमारी को दरकिनार किए जाने से असहमत दिख रहा है। दबी जुबान में विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद अब इस निर्णय को चुनौती देना मुश्किल है।
क्या होगा अगला कदम?
नामांकन प्रक्रिया: पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में संजीव सिन्हा पर्चा भरेंगे।
दावेदारी: यदि कोई दूसरा नाम सामने नहीं आता है, तो प्रक्रिया निर्विरोध संपन्न होगी।
घोषणा: नामांकन के अगले ही दिन आधिकारिक रूप से नए जिलाध्यक्ष के नाम पर मुहर लग जाएगी।
अब देखना दिलचस्प होगा कि संजीव सिन्हा की इस संभावित ताजपोशी के बाद गुटबाजी में बंटी महानगर भाजपा को वे कितना एकजुट रख पाते हैं।

