‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का नया जाल, जिसमें सोशल मीडिया और कॉल्स के जरिए ठगी हो रही है, जानें कैसे रहें सतर्क
डिजिटल ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे बड़े-बड़े संपन्न लोग भी शिकार बन रहे हैं। भारत में इन साइबर हमलों से बचाव के लिए सजगता और सतर्कता ही मुख्य उपाय हैं।

डिजिटल फ्रॉड कर ठगी का नया तरीका बाजार में आया है जिसे हम डिजिटल अरेस्ट के नाम से जान रहे हैं। इस बार चर्चा उसी विषय की, जिसपर हम सब को सजग रहने की जरूरत है। वर्धमान ग्रुप के सीईओ एसपी ओसवाल, पीजीआई लखनऊ में डॉक्टर डॉ रुचिका टंडन, आज तक चैनल की चर्चित एंकर ऋचा मिश्रा और न जाने कितने ही पढ़े लिखे, संपन्न लोग इस डिजिटल ठगी के शिकार हो रहे हैं। “डिजिटल अरेस्ट” कितनी गंभीर समस्या हो गई है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि “मन की बात” में भी पीएम नरेंद्र मोदी जी ने डिजिटल अरेस्ट के स्कैम के बारे में देशवासियों को सचेत किया।
डिजिटल अरेस्ट को कैसे अंजाम दिया जाता है:
न्यूड कॉल: कॉल के एक तरफ न्यूड महिला की तस्वीर होती है। जैसे ही कॉल रिसीव की जाती है व्यक्ति का न्यूड कॉल पर बात करते हुए तस्वीर का स्क्रीनशॉट ले लिया जाता है। फिर स्क्रीनशॉट वायरल करने की धमकी दी जाती है।
पार्सल का जिक्र: फोन कर लोगों को कहा जाता है कि आपका कोई पार्सल आया है या आपने कोई पार्सल भेजा है जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ लिया है। इसे छुड़ाने के पैसे लगेंगे।
संबंधियों का जिक्र: फोन कर यह बताया जाता है कि आपकी किसी रिश्तेदार का एक्सीडेंट हो गया है या वह किसी परेशानी में फंस गया है पैसे भेज दीजिए तो आपके संबंधी की मदद हो जाएगी।
अफसर होने का ढोंग: इसमें अपराधी पुलिस या अफसर का की वर्दी पहने कमरे पर आता है और कहता है कि आपके खिलाफ केस किया गया है। इस केस को क्लोज करने के पैसे लगेंगे।
कुछ मामलों में लोगों को पुलिस थाने कोर्ट रूम के फर्जी सेटअप भी दिखा दिए जाते हैं।
“आरबीआई कहता है, जानकार बनिये, सतर्क रहिये”, रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर सामान्य नागरिकों को यह बताकर उन्हें बराबर साइबर फ्रॉड के प्रति सचेत करने वाले बिग बी अमिताभ बच्चन स्वयं ही ऑनलाइन धोखेबाजी के शिकार हो गए थे जब साइबर अपराधियों ने उनके खाते से पांच लाख रूपये उड़ा लिए थे। आरबीआई की एडवाइजरी से शायद बिग बी स्वयं सचेत नहीं हुए थे। यह अलग बात है कि उनके खाते से रुपए चुराने वाले दो शातिर अपराधी बाद में पकड़े गए।
भारत में साइबर अपराध का सबसे बड़ा मामला तेलंगाना राज्य का है जब वहां के एक 75 वर्षीय बुजुर्ग से 13 करोड रुपए की ठगी कर ली गई। उनके पैसे डबल-ट्रिपल हो जाएंगे, यह कहकर निवेश करने का लालच दिया और फिर पैसे ऐंठते चले गये।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वर्ष 2024 के शुरुआती चार महीनों में साइबर फ्रॉड की. 62,687 शिकायतें दर्ज की गई। इनमें कुल 2.2 बिलियन रुपयों का नुकसान हो चुका है। गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री संजय कुमार ने 24 जुलाई 2024 को राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया था कि भारत सरकार ने 379 ऐसी वेबसाइट बंद कराई है और 2000 से ज्यादा एप्लीकेशन प्ले स्टोर से हटवाया है जिनमें इंस्टेंट लोन एप के बहाने लोगों को फंसा लिया गया था। इन एप्लीकेशंस ने 2400 करोड रुपए से ज्यादा के फ्रॉड किए थे। भारत में डेटा संग्रह करने वाली एप्लीकेशन I4C ने डेटिंग एप्स के बारे में बताया कि जनवरी से अप्रैल 2024 तक डेटिंग एप्स की 1725 शिकायतें दर्ज हुई जिससे 132.3 मिलियन रुपए का नुकसान हुआ।
आज बहुत से लोग दोस्ती के नाम पर Instagram, Facebook, Skype जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी निजी तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं और ऐसे में ही उन्हें कोई मालवेयर मिल जाता है।
नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने एक आंकड़ा जारी किया है कि भारत में हर रोज 5000 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। यह सभी शिकायतें 1930 नंबर पर दर्ज की गई है, जिसे NCRB ने जारी कर रखा है। साइबर जालसाजों के जाल में फंसने वाले ये लोग अनपढ़ या कम पढ़े लिखे हैं, ऐसा भी नहीं है। आंकड़ा देखा जाए तो यह बात साफ समझ में आती है। दिल्ली में हर महीने 780, हरियाणा में 381 और तेलंगाना में 261 साइबर क्राइम रिपोर्ट हो रहे हैं। इन राज्यों में साक्षरता दर अपेक्षाकृत ज्यादा है और ये देश की इकोनॉमी में ज्यादा योगदान देते हैं।
साइबर अपराधियों का ठिकाना सिर्फ देश ही नहीं भारत के बाहर भी है। कई बार हमारे देश से लोगों को नौकरी का झांसा देकर दूसरे देशों में ले जाया जाता है। वहां पहुंचने पर उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें वापस लौटने से रोक दिया जाता है। फिर इनसे cyber slavery कराई जाती है। उन्हें अपने देश के ही लोगों को अपनी भाषा में ठगने का काम करना होता है। अब उन देशों में भारतीय पुलिस का सीधे दबिश देना इतना आसान नहीं होगा, विदेश में फ्रॉड केंद्र बनाने का सबसे बड़ा फायदा यही है। आंकड़ों की माने तो जनवरी 2022 से मई 2024 के बीच विजिटर वीजा पर कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम जाने वाले भारतीयों में से 29,466 भारतीय आज तक देश नहीं लौटे हैं। इनमें से आधे से अधिक यानी लगभग 17000 लोग 20 साल से 39 साल की उम्र सीमा के हैं। इनमें से ज्यादातर पंजाब, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों से हैं। थाईलैंड में ऐसे मामलों की संख्या लगभग 69% है जब वहां गए भारतीय लोग लापता हो गए। 20,450 लोग अकेले थाईलैंड में लापता हुए हैं। हाल ही में कंबोडिया से लौटे 26 युवकों ने अपनी cyber slavery की कहानी बताई कि कैसे उनका पासपोर्ट जब्त कर उन्हें ट्रेनिंग देकर साइबर स्लेवरी के काम में लगाया गया। यानी, अब साइबर क्रिमिनल एक तरह से स्लीपर सेल का काम करने लगे हैं ताकि कैसे दूसरे देश को बर्बाद किया जाए।
हाल ही में भारत सरकार ने दक्षिण पूर्व एशिया में 2.7 करोड़ मोबाइल फोन कनेक्शन हाल ही में काटे हैं जो कि नकली या जाली दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए थे। IIT Kanpur की Incubator Startup Research Foundation की रिपोर्ट के अनुसार, देश के टॉप टेन साइबर अपराध केदो में राजस्थान का भरतपुर अकेले 18 फ़ीसदी साइबर क्राइम के लिए जिम्मेदार था। इसके बाद मथुरा उत्तर प्रदेश में, नूह हरियाणा में, देवघर झारखंड में साइबर अपराधों के लिए जाने जा रहे हैं।
साइबर स्कैम से बचने का सर्वोत्तम उपाय सजग और जागरूक रहना ही है , कानूनी एजेंसियों की भूमिका घटना होने के बाद आती है। यही बात पी एम मोदी ने भी मन की बात में बतायी।

