पोटका के टांगरेन स्कूल में संताली सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ
पांच दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक संगीत और नृत्य को संरक्षित करना है
टांगरेन स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पांच दिवसीय संताली पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र और नृत्य संगीत कार्यशाला शुरू हुई।
जमशेदपुर – 1 अगस्त को टांगराईन स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में संताली पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र और नृत्य संगीत पर पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई।
टाटा इस्पात फाउंडेशन और आदिवासी रोमोज अखाड़ा मिलकर इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।
कार्यशाला का समन्वयन विद्यालय के अधीक्षक अरविंद तिवारी तथा सामाजिक कार्यकर्ता जयहरि मुंडा, उज्ज्वल मंडल और शंकर हेम्ब्रम ने किया।
इसका प्राथमिक लक्ष्य पारंपरिक जनजातीय संस्कृति को सुरक्षित रखना और उसे आगे बढ़ाना है, जो तेजी से लुप्त हो रही है।
प्रतिभागियों को संगीत, नृत्य और संगीत वाद्ययंत्रों की मूल बातें सिखाई जाएंगी।
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहन जिज्ञासा और उत्साह की भावना पैदा करना है।
इस कार्यक्रम के कार्यक्रम समन्वयक बाबूलाल गोईपाई हैं।
प्रशिक्षकों में नुनाराम मुर्मू, काशीनाथ सोरेन, सवाना टुडू, डुमनी मुर्मू, निरसो टुडू, संगीता समद और श्रीमती मार्डी शामिल हैं।
यह पहल जनजातीय परंपराओं को संरक्षित करने के लिए एक सहयोगात्मक प्रयास को दर्शाती है।
यह कार्यशाला युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
इस आयोजन में स्वदेशी कला रूपों और प्रथाओं के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया गया।
