इचागढ़ विधानसभा सीट को लेकर भाजपा और आजसू के बीच विवाद
भाजपा और आजसू के बीच संघर्ष तेज हो गया है क्योंकि दोनों पार्टियां ईचागढ़ सीट पर दावा कर रही हैं।
भाजपा ने पारंपरिक दावा पेश किया जबकि आजसू ने आगामी चुनावों के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा की।
जमशेदपुर – रांची लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ विधानसभा सीट को लेकर भाजपा और आजसू गठबंधन के बीच बड़ी दरार उभर कर सामने आई है।
सोमवार को आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने ईचागढ़ का दौरा किया और घोषणा की कि यह सीट आजसू को मिलेगी तथा हरेलाल महतो उनके उम्मीदवार होंगे।
सुदेश महतो का बयान और भाजपा की प्रतिक्रिया
सुदेश महतो ने कहा, “हरेलाल महतो ईचागढ़ से चुनाव लड़ेंगे और जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करेंगे।”
जवाब में, बी जे पी नेताओं ने आजसू के दावे का मुखर विरोध किया है।
ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद सिंह उर्फ मलखान सिंह ने कड़ी असहमति जताते हुए कहा, “ईचागढ़ पारंपरिक रूप से भाजपा की सीट रही है। हमने पहली बार 2000 में इसे जीता था और तब से हम यहां चुनाव लड़ते आ रहे हैं।”
अरविंद सिंह ने ईचागढ़ में भाजपा की ऐतिहासिक सफलता पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि पार्टी इस क्षेत्र में झामुमो को हराने में सक्षम है।
उन्होंने आजसू के बयान की आलोचना करते हुए कहा, “आजसू के दावे से भाजपा कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा है। भाजपा ईचागढ़ पर अपना दावा नहीं छोड़ेगी।”
तनाव और पार्टी गतिशीलता
भाजपा के जिला अध्यक्ष उदय सिंहदेव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महतो की घोषणा को गठबंधन के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
सिंहदेव ने कहा, “ईचागढ़ भाजपा का गढ़ रहा है और हमारा जमीनी संगठन मजबूत है।”
उन्होंने कहा कि रांची लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार संजय सेठ की जीत में ईचागढ़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सिंहदेव ने कहा, “बिना परामर्श के आजसू उम्मीदवार की घोषणा करने से एनडीए कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। हमारे कार्यकर्ता भाजपा के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को स्वीकार नहीं करेंगे।”
आगामी चुनावों पर प्रभाव
सुदेश महतो की एकतरफा घोषणा से ईचागढ़ में एनडीए गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ गया है।
महतो ने हरेलाल महतो को ईचागढ़ से एनडीए उम्मीदवार घोषित करते हुए उनकी जीत की भविष्यवाणी की।
आंतरिक असंतोष से जूझ रही भाजपा अपने उम्मीदवार के लिए विवादास्पद चयन प्रक्रिया की तैयारी कर रही है।
नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग ने ईचागढ़ में राजनीतिक माहौल को पहले ही गरमा दिया है।
