भारत: आबादी को पोलियो मुक्त रखने के लिए उत्सवों के दौरान टीकाकरण
भारत: आबादी को पोलियो मुक्त रखने के लिए उत्सवों के दौरान टीकाकरण
भारत में पोलियो का आख़िरी मामला, 13 जनवरी 2011 को दर्ज किया गया था. लेकिन आबादी के बीच उच्च प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण के हिस्से के रूप में, पाँच साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो का टीका लगाना जारी है.
मामलों की पहचान के लिए, भारत में तीव्र फ्लेसीड पैरालिसिस निगरानी के अलावा, पर्यावरण की निगरानी पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
इसके तहत, मल में पोलियो वायरस का पता लगाने के लिए, देश भर की कुछ चुनी हुई जगहों से सीवेज नमूनों का नियमित संग्रह एवं परीक्षण किया जाता है. पर्यावरण निगरानी से उन लोगों में भी पोलियो की पहचान सम्भव होती है, जिनमें इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते.
उत्सव के साथ स्वास्थ्य लाभ
श्री जगन्नाथ रथ यात्रा, दुनिया के बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समारोहों में से एक है. इस उत्सव में, भक्तजन, पुरी की सड़कों पर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के तीन विशाल हस्तनिर्मित लकड़ी के रथों को खींचते हैं.
जून 2023 में पुरी में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव के लिए, देश भर से 15 लाख से अधिक भक्त, नौ दिनों के लिए ओडिशा के तटीय मन्दिर शहर पुरी में एकत्र हुए.
ज़िला स्वास्थ्य विभाग ने, इस अवसर का लाभ उठाते हुए, 20 जगहों पर चार दिवसीय विशेष पोलियो टीकाकरण अभियान आयोजित किया, जिसके तहत 5 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों का टीकाकरण करवाने की योजना बनाई.
ओडिशा राज्य सरकार ने राज्य के भंडार से पोलियो वैक्सीन की 30 हज़ॉार ख़ुराकें आवंटित कीं, जिनका उपयोग मेले के मैदानों और सामुदायिक बाज़ारों में, 5 वर्ष तक की आयु वर्ग के 7 हज़ार 621 बच्चों को टीका लगाने के लिए किया गया.
ओडिशा राज्य सरकार के अनुरोध पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के भारत-राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य सहायता नैटवर्क (NPSN) ने, गुणवत्ता कवरेज सुनिश्चित करने के लिए योजना और सहायक पर्यवेक्षण में सहायता मुहैया कराई.
डब्ल्यूएचओ इंडिया-एनपीएसएन ने सत्र स्थलों पर योजना निर्माण में भी मदद दी, जिसमें विशेष पोलियो टीकाकरण अभियान के सभी चार दिनों में टीका लगाने वालों और मैदानी निरीक्षकों को उचित दिशानिर्देशों से अवगत कराना शामिल था.
अभियान का असर
इस टीकाकरण अभियान के ज़रिए उच्च टीकाकरण कवरेज हासिल हुआ. WHO-NPSN द्वारा समर्थित स्वतंत्र निगरानी मूल्यांकन से मालूम हुआ कि:
• 93% बच्चों की उंगलियों पर निशान छोड़कर जाँच की गई.
• 100% बच्चों को ड्रॉपर के ज़रिए, बच्चे का मुँह छुए बिना टीका दिया गया.
• 100% स्थलों पर पर्याप्त संख्या में टीमें तैनात थीं.
• 95% पारगमन बिन्दुओं पर व्यक्तियों की पूर्ण मौजूदगी थी.
• सभी वैक्सीन की शीशियाँ, उपयोग योग्य अवस्था में थीं (कोई अप्रयुक्त/आंशिक रूप से प्रयुक्त, वैक्सीन की शीशी नहीं मिली).
भारत में WHO और NSPN की फील्ड टीमें स्वतंत्र रूप से टीकाकरण सत्रों की निगरानी करती हैं और टीकाकरण से वंचित होने के कारणों सहित कवरेज का सामुदायिक मूल्यांकन करती हैं.
उपराष्ट्रीय स्तर पर डेटा की निगरानी का उपयोग, टीकाकरण के रास्ते में आने वाली अड़चनों व अन्तराल से निपटने हेतु, अनुकूलित टीकाकरण रणनीतियों अपनाने के लिए किया जाता है.
भारत में डब्ल्यूएचओ, क्षमता निर्माण, उच्च जोखिम व कम प्रभाव वाले क्षेत्रों की पहचान एवं कवरेज, निगरानी व डेटा विश्लेषण, तथा साक्ष्य-आधारित कार्रवाई लागू करने में, राष्ट्रीय और प्रदेश सरकारों की सहायता करता है.
