पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी में फूट के बाद बागी और वफादार गुट के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था

कोलकाता, 18 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस की विधायी दल के दो गुटों के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था की गई है।

पहला गुट बागी और बहुमत वाला है, जिसका नेतृत्व पार्टी से निकाले गए नेता और आधिकारिक तौर पर विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दूसरा गुट अल्पसंख्यक है, जो पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार है; इसका नेतृत्व शोभनदेव चट्टोपाध्याय कर रहे हैं, जो अभी सदन के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।

माइनॉरिटी गुट के विधायक कुणाल घोष ने पुष्टि की है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में इन दोनों गुटों के लिए अलग-अलग कमरों में बैठने की व्यवस्था की गई है।

राज्य विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों की कुल संख्या 80 है। इनमें से 60 विधायक आधिकारिक तौर पर बागी गुट में हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि यह संख्या बढ़कर 64 हो गई है।

गुरुवार को जब सदन का बजट सत्र शुरू हुआ तो बागी गुट के कुल 58 विधायक सदन में मौजूद थे, जबकि मूल गुट के कुल 17 विधायक मौजूद थे।

मीडिया से बात करते हुए कुणाल घोष ने कहा कि उन्होंने और मूल गुट के अन्य विधायकों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्य संसदीय मामलों के मंत्री शंकर घोष से सदन में किसी भी विषय पर भाषण देने के लिए समय आवंटित करने के बारे में बात की है।

कुणाल घोष ने कहा, “मुख्यमंत्री और राज्य संसदीय मामलों के मंत्री ने हमें अलग से समय आवंटित करने का भरोसा दिया है। हम किसी भी हाल में समय आवंटन के लिए ऋतब्रत बनर्जी के पास नहीं जाएंगे।”

राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष की बेंच की मौजूदा स्थिति काफी दिलचस्प और साथ ही दुर्लभ है।

शहर के एक राजनीतिक जानकार ने कहा, “दोनों गुट आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस से हैं और दोनों गुटों के विधायक आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं। फिर भी ये दोनों गुट दो अलग-अलग राजनीतिक ताकतों की तरह काम करेंगे।”

एससीएचडीकेपी

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