जमशेदपुर : लंबे समय के बाद पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रहा है। भले ही हाई कोर्ट के आदेश से ही सही। गुरुवार को भुईयांडीह में वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए लगभग 60 मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चला। इस अतिक्रमण से प्रभावित लोगों की समस्या अपनी जगह है पर अतिक्रमण के लिए राजनीतिक दल, पुलिस और प्रशासन तीनों जिम्मेदार हैं।
सत्ता पर जो भी राजनीतिक दल काबिज होता है, उसके लिए नियम कानून बेमानी है। चाहे या अनचाहे प्रशासन भी ऐसे मामलों में तमाशबीन बना रहता है। साल दर साल यह सिलसिला चलता है और जब न्यायालय का आदेश पारित होता है तब अतिक्रमण हटाया जाता है। इस मामले में राजनीति की बू आती है। न्यायालय की शरण में जाने वाले भी कहीं न कहीं से प्रभावित होते हैं या फिर उनका कोई स्वार्थ होता है।
अपने देश की शासन व्यवस्था भी अजीब है, पहले बसाता है उसके बाद कोर्ट का हवाला देकर तोड़ दिया जाता है। उस पर तुर्रा यह कि सरकारी जमीन पर बस जाओ, जब हटाया जाएगा तो मुआवजा या फिर से कहीं बसाने की मांग की जाएगी। इसमें राजनीतिक दल भी शामिल होते हैं।
बहरहाल पहली बात यह कि भारत के व्यवस्थित तरीके से बसे शहरों की सूची में जमशेदपुर भी शामिल है। वर्षों तक जब अाबादी कम थी तो शहर का वातावरण भी बेहतर था लेकिन अब स्थिति ठीक इसके उलट है। प्रशासन की लापरवाही, बढ़ी आबादी के कारण यदि समय रहते इसमें सुधार नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
जरूरत के हिसाब से हो रही कार्रवाई
उधर रांची नगर निगम की ओर से मंगलवार को कांटाटोली के खादगढ़ा में बिरसा मुंडा अंतरराज्यीय बस टर्मिनल परिसर को अतिक्रमण मुक्त करने को अभियान चलाया गया था। बुजुर्ग, महिला व बच्चों की सुरक्षा को लेकर दिन के दस से शाम पांच बजे तक अभियान चला, जिसमें सड़क के किनारे से अवैध संरचना को ध्वस्त किया गया। बांस व बल्लियों के अलावा कंक्रीट से तैयार निर्माण को भी ढाह दिया गया। नाजायज मजमा लगाने, अड्डाबाजी और बिना काम के परिसर में समूह में इकट्ठे युवकों को पुलिस की टीम ने खदेड़ा।
भुईयांडीह तो बानगी भर है
भुईयांडीह से अतिक्रमण हटाया गया कोर्ट के आदेश के हवाला देकर लेकिन अब कई राजनीतिक दल विस्थापितों को बसाने की मांग कर रहे हैं।
डा. अजय कुमार : पूर्व सांसद डा. अजय कुमार मामले को दुखद बताते हुए कहते हैं कि इस मामले में जमशेदपुर के सांसद और विधायक से सवाल पूछना चाहिए कि क्या उन्होंने इसलिए वोट दिया था कि एक दिन उनके घर को तोड़ दिया जाएगा। प्रभावित लोगों को इसकी सूचना भी नहीं दी गई।
पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां : उनके नेतृत्व में लोगों ने प्रदर्शन किया। दो घंटे तक जाम के कारण आवागमन बाधित रहा। सरकार और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की। टाटा स्टील के एमडी के आवास का घेराव करने की भी चेतावनी दी। काबिलेतारीफ है कि किसी जमाने में दुलाल भुईयां भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के सिपाही थे और उनका कार्यालय भी इसी क्षेत्र में है।
पूर्णिमा साहू, विधायक जमशेदपुर पूर्वी : विधायक पूर्णिमा साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रांची में मुलाकात की। उन्हें बर्निंग घाट के समीप से अतिक्रमण हटाने की जानकारी दी। उनका तर्क था कि प्रशासन ने इतना समय भी नहीं दिया तो प्रभावित लोग अपना सामान हटा सकें। ठंड के मौसम का भी हवाला दिया। विधायक ने मुख्यमंत्री से प्रभावित परिवारों के तत्काल पुर्नवास, राहत सामग्री, अस्थायी आश्रय और आगे किसी भी कार्रवाई से पूर्व स्पष्ट सीमांकन और पूर्व सूचना की अनिवार्यता की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि उपायुक्त से बात कर आवश्यक कदम उठायेंगे।
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