पटमदा : पटमदा एवं बोड़ाम प्रखंड के विभिन्न गांवों में गुरुवार को बांदना पर्व के मौके पर गोरु खूंटा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बारियादा, महुलबना, केंदडीह, मेजुरनाचा, काशिडीह, धादकिडीह, पटमदा और लायाडीह में बांदना/सोहराय पर्व के अवसर पर गोरु खूंटा कार्यक्रम पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया।
झारखंड की लोक संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़ा यह पर्व ग्रामीण अंचलों में विशेष आस्था और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान किसानों ने बेहतर फसल और पशुधन की समृद्धि की कामना की।
परंपरागत रीति से गौ-चुमान एवं गोहाल पूजा की गई, जिसमें गाय, बैल, भैंस सहित कृषि उपकरण — हल, कुदाल, रक्सा, मेर, जुआठ आदि की पूजा की गई। महिलाओं ने चावल के आटे से घर से लेकर गोहाल तक सुंदर चौक (रंगोली) बनाकर अपनी आस्था प्रकट की। पूरे गांवों में घर आंगन की लीपापोती कर कुल्ही से लेकर संपूर्ण आंगन में चौक पूरा गया।
इस दिन सभी गाय-बैलों को पैर धोकर तेल-सिंदूर लगाकर चुमान बंधन किया गया और ढोल, मांदर, नगाड़े की थाप पर सोहराय गीत गाकर परंपरा को जीवंत किया गया। पशुधन को खूंटे में बांधकर आत्मरक्षा का प्रतीकात्मक प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे जंगल में हिंसक जानवरों से अपनी रक्षा कर सकें। पूरे क्षेत्र में पकवान बने और लोग नाच-गान करते हुए उत्सव का आनंद लेते दिखे।
इस दौरान बारियादा सोलाआना कमिटी की ओर से आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बैल और भैंसा मालिकों सहित वाद्य यंत्र बजाने वाले 25 लोगों को कुड़माली पीला गमछा देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सभी ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि “छोटानागपुर की पारंपरिक कला-संस्कृति और 12 मासे 13 परब” जैसे करम, टुसू, जीता आदि पर्वों को हर साल पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा, ताकि हमारी संस्कृति और परंपरा संरक्षित रह सके। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक परेश नाथ महतो, पशुपति महतो, खगेन महतो, सतीश, सुधांशु, गोपेन, मृत्यंजय,नीलकमल, सुमित, तारापद, मनबोध, रूपेश, राकेश, दीपक, देवेन, सोमेन, अजय, कृष्ण, सुकुमार, जयदेव, दुलाल, विजय, राजू, मनसा राम, तपन, जगबंधु आदि का सराहनीय योगदान रहा।
