प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने दलमा अभयारण्य में दी जानकारी
दलमा अभयारण्य में नहीं है कोई स्थायी रेस्क्यू सेंटर
जमशेदपुर : झारखंड में लगातार हाथियों की मौत और वन्य जीव दुर्घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने चाईबासा में क्षेत्रीय स्तर पर रेस्क्यू सेंटर बनाने का निर्णय लिया है। यह जानकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) परितोष उपाध्याय ने रविवार को दलमा वन्यजीव अभयारण्य में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मनोरहरपुर, चाईबासा और चक्रधरपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों में आए दिन हाथी ट्रेनों की चपेट या बिजली के झटकों से घायल हो रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में वन विभाग को तत्काल चिकित्सा सुविधा की जरूरत महसूस हुई। इसी के मद्देनजर स्थानीय अधिकारियों को रेस्क्यू सेंटर के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित करने का निर्देश दे दिया गया। फिलहाल दलमा अभयारण्य में हाथियों या अन्य जंगली जानवरों के लिए कोई स्थायी रेस्क्यू सेंटर नहीं है।
उपाध्याय ने कहा कि टाटा जूलॉजिकल पार्क में सीमित रेस्क्यू सुविधा उपलब्ध है, लेकिन चाईबासा जैसे इलाके के लिए क्षेत्रीय स्तर पर किसी केंद्र का न होना गंभीर समस्या है। इसलिए कोल्हान क्षेत्र में वन्य जीवों के बचाव की दक्षता बढ़ाने के लिए चाईबासा में सेंटर बनाना बेहद जरूरी हो गया है। जानकारी के मुताबिक, एक दशक पहले दलमा को रेस्क्यू सेंटर के लिए चिह्नित किया गया था, लेकिन योजना आजतक धरातल पर नहीं उतर सकी। वहीं, हजारीबाग के बार्वे में राज्यस्तरीय रेस्क्यू सेंटर का निर्माण जारी है, पर वहां ऑपरेशन कंपाउंड न बनने से वह अधूरा है। इस कारण गंभीर रूप से घायल हाथियों के इलाज में दिक्कतें बरकरार हैं।
वर्तमान में जब कोई हाथी घायल होता है तो उसकी चिकित्सा के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा या अन्य राज्यों की टीमों की मदद लेनी पड़ती है। ऐसे में चाईबासा का नया रेस्क्यू सेंटर कोल्हान क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और गति देने वाला कदम साबित हो सकता है।
