जमशेदपुर : चाकुलिया से लेकर जमशेदपुर तक के कारोबार जगत में अपनी समृद्घ विरासत के जरिए खास पहचान रखने वाले खुराना परिवार के मजबूत स्तंभ कैलाश चंद्र खुराना के परलोक गमन से चौतरफा शोक है।
अपनी सहृदयता, मिलनसारिता और सेवा भाव के जरिए लोगों को अपने से जोडऩे में महारत रखने वाले कैलाश बाबू के निधन से चाकुलिया क्षेत्र के लोग जितने मर्माहत हैं उतने ही ज्यादा गंभीर जमशेदपुर में रहने वाले उनके परिचित भी हैं।
बैठक का आयोजन चंद्रबली उद्यान काशीडीह में
आज पांच अक्टूबर रविवार को उनकी स्मृति में बैठक का आयोजन जमशेदपुर के काशीडीह स्थित चंद्रबली उद्ययान के ए-ब्लॉक (5/3) में हो रहा है। जमशेदपुर में उनके विशाल परिवार के अनेक सदस्य सगे-संबंधी और मित्र-शुभचिंतक रहते हैं। परिजनों ने यह आयोजन किया है।
कैलाश बाबू के शोकाकुल परिवार में उनके भ्राता बसंत लाल खुराना, दो पुत्रों किशलय खुराना और कुणाल खुराना समेत अन्य सदस्यों द्वारा उठावा व प्रसाद कार्यक्रम का आयोजन 6 अक्टूबर सोमवार को दिन 12.30 बजे से अग्रसेन भवन, आम बगान साकची में किया गया है।
1947 में चाकुलिया आया परिवार
भारत केे बंटवारे के बाद 1947 में इनके पिता दीनानाथ खुराना चाकुलिया आए थे और छोटे स्तर से कारोबार का शुभारंभ किया था जो आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।
धर्म में भी गहरी आस्था
हंसमुख स्वभाव के धनी कैलाश बाबू की धर्म में भी गहरी आस्था थी। चाकुलिया में अपने घनिष्ठ मित्रों विनोद सेकसरिया, रवि झुनझुनवाला, गिरधारी रूंगटा आदि के साथ वे धर्म समाज के कार्य में भी हमेशा सक्रिय रहते थे। चाकुलिया में रंकिणी मंदिर के जीर्णोद्घार में इनकी अहम भूमिका थी। मंदिर के रखरखाव में इनकेे परिवार का योगदान रहा है। शिव मंदिर निर्माण में भी इन्होंने योगदान किया था। जरूरतमंदों की मदद बिना किसी प्रचार-प्रसार के करने में इनकी रूचि रहती थी।
विरासत को संजोकर रखा
इनके बड़े भाई बसंत खुराना, भतीजे हेप्पी खुराना व काकू खुराना याद करते हैं कि कैसे उन्होंने परिवार के बीच अपनी विरासत को संजोकर रखने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया था।
हर कोई मर्माहत
सामाजिक आयोजनों में भी वे सक्रिय भूमिका निभाते थे। कई धार्मिक-सांस्कृतिक और कल्याणकारी कार्यक्रमों के आयोजन में नेतृत्वकारी भमिका निभाई थी। यही कारण है कि कैलाश बाबू के निधन से उन्हें जानने वाला हर कोई मर्माहत है। सभी उन्हें कर्मठ, विचारशील और संवेदनशील हस्ती के रूप में याद कर रहे हैं और उनके परलोक गमन को अपूर्णीय क्षति मानते हैं। वास्तव में समाज और धर्र्र्म के क्षेत्र में उनकी सेवाएं लंबे समय तक याद की जाएंगी। उनके आदर्श और कार्य खुराना परिवार के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

