झारखंड के चक्रधरपुर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हिंसा, चाकूबाजी में सात घायल
चाईबासा : शुक्रवार रात चक्रधरपुर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान दो पूजा समितियों के बीच हुए विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।
घटना में चाकूबाजी की वारदात सामने आई है, जिसमें सात युवक घायल हो गए हैं। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना चक्रधरपुर रेलवे हरिजन बस्ती दुर्गा पूजा समिति और एक अन्य पूजा पंडाल के सदस्यों के बीच हुई, जहां विसर्जन जुलूस के दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद कुछ ही मिनटों में हाथापाई और फिर चाकूबाजी में बदल गया।
इस दौरान हरिजन बस्ती के पांच युवकों पर अचानक भीड़ ने हमला कर दिया। रिक्की मुखी नामक युवक को चाकू मारे जाने की पुष्टि हुई है।
गंभीर रूप से घायल रिक्की को स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल रेलवे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
अन्य घायलों को भी प्राथमिक उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। हालांकि झड़प के बाद कुछ देर के लिए इलाके में तनाव व्याप्त रहा, लेकिन पुलिस की तत्परता से स्थिति बिगड़ने से बच गई।
पुलिस कर रही है जांच
चक्रधरपुर थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है।
घटनास्थल से कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घायल युवकों के बयान के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को चिन्हित कर शीघ्र गिरफ्तारी की जाएगी।
प्रशासन ने की शांति की अपील
इधर, घटना के बाद प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
एसडीओ और डीएसपी ने मौके का दौरा किया और दोनों पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया। स्थानीय सामाजिक संगठनों और पूजा समिति के वरिष्ठ सदस्यों से भी सहयोग की अपील की गई है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में नाराज़गी देखी जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं त्योहारों की पवित्रता को ठेस पहुंचाती हैं। कई लोगों ने विसर्जन के दौरान प्रशासनिक सुरक्षा की कमी पर भी सवाल उठाए हैं।
बताते चलें कि चक्रधरपुर क्षेत्र में दुर्गा पूजा का आयोजन बड़े धूमधाम से होता है। हर वर्ष दर्जनों पूजा पंडाल बनते हैं और विसर्जन जुलूस के दौरान हजारों की भीड़ सड़कों पर होती है।
ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती बढ़ जाती है। बीते कुछ वर्षों में यहां ऐसी कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुई थी, जिससे इस बार की घटना ने प्रशासन और जनता दोनों को चौंका दिया है।



