आखिरकार ग्रामीण कार्य विभाग के विवादित कार्यपालक अभियंता राजेश रजक का तबादला
जमशेदपुर: आखिरकार ग्रामीण कार्य विभाग के विवादित और बहुचर्चित कार्यपालक अभियंता राजेश रजक का तबादला कर दिया गया। उनका तबादला ग्रामीण कार्य के ही गुण नियंत्रण प्रमंडल डाल्टनगंज किया गया है। यह पोस्टिंग उनके कद के हिसाब से पनिशमेंट पोस्टिंग मानी जा रही है। रजक ने आज नीरज कुमार मिश्रा को पदभार सौंप दिया, जो इससे पूर्व कार्यपालक अभियंता रामगढ़ थे। कार्यभार के बाद इंजीनियर और ऑफिस के कर्मचारी बिष्टपुर स्थित एक होटल पहुंचे, जहां भोजन के साथ विदाई समारोह का आयोजन हुआ। लंबे समय से पूर्वी सिंहभूम जिले में पदस्थापित राजेश रजक बेहद रसूखदार इंजीनियर के रूप में पहचान रखते थे। उनकी तीन-तीन जगह पोस्टिंग या प्रतिनियुक्ति थी। ग्रामीण कार्य के कार्यपालक अभियंता के अलावा वे एनआरईपी के भी कार्यपालक अभियंता थे। दूसरी ओर, 125 किलोमीटर दूर राजधानी रांची में भी उन्हें प्रभार मिला हुआ था। कार्यकाल के दौरान उन पर कई गंभीर आरोप भी लगे। सबसे बड़ा आरोप उन पर था कि उन्होंने अपने ही कार्यालय में अपने छोटे भाई का ठेकेदार के रूप में रजिस्ट्रेशन करवा रखा था और उसके नाम पर ठेकेदारी करते थे। उन पर पूर्व डीसी विजया जाधव की विशेष कृपा दृष्टि की भी चर्चा रही थी। हालांकि कतिपय कारणों से दोनों के बीच रिश्ते में इतनी खटास आ गई कि उपायुक्त ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी। इसके तहत प्रपत्र क गठन कर विभाग से कार्रवाई अनुशंसा कर दी थी। यह अलग बात है कि राजेश रजक अपनी रसूख की बदौलत आज तक उस फाइल को दबाने में कामयाब रहे। वैसे उन पर यह विभागीय कार्रवाई इसलिए चलाई गई थी, क्योंकि उन्होंने एक करोड रुपए से अधिक की बहरागोड़ा स्थित चित्रेश्वर मंदिर के सौंदर्यीकरण योजना को खुद ही तकनीकी मंजूरी दे दे दी थी, जबकि उनके पास मात्र 25 लाख रुपए तक की योजना को ही स्वीकृति देने का ही अधिकार था। तत्कालीन डीसी विजया जाधव से इस बात की शिकायत विधायक समीर मोहंती ने की थी और इस वजह से उन्हें यह कार्रवाई करनी पड़ी थी। ये अलग बात है कि जानकार कार्रवाई की वजह कुछ और भी वजह बताते हैं।
