कांग्रेस की जीत या हार से गठबंधन राजनीति की दिशा पर पड़ेगा असर
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। यह चुनाव केवल राज्य तक सीमित नहीं है। इसके परिणाम पर राष्ट्रीय राजनीति की भी नजर बनी हुई है।
हालांकि, इस चुनाव के नतीजों से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं, रांची में हेमंत सोरेन सरकार की स्थिरता पर भी इसका सीधा असर नहीं दिखता।
इसके बावजूद चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति है। यदि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीत दर्ज करता है, तो इसे इंडिया गठबंधन की एकजुटता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
दूसरी ओर, यदि कांग्रेस को सफलता नहीं मिलती है, तो विपक्षी राजनीति में उसकी भूमिका पर नए सवाल उठेंगे। इससे यह धारणा मजबूत हो सकती है कि कई राज्यों में कांग्रेस अपने सहयोगियों पर अधिक निर्भर है।
इसके अलावा, चुनाव परिणाम सहयोगी दलों के बीच कांग्रेस की सौदेबाजी क्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि झारखंड का यह चुनाव संख्या बल से अधिक राजनीतिक संदेश का चुनाव बन गया है। इसलिए इसके नतीजे राष्ट्रीय विपक्ष की भावी दिशा तय करने वाले संकेतक साबित हो सकते हैं।

