विशेषज्ञों ने लोगों से ऑनलाइन जानकारी साझा करने से पहले सत्यापन करने की अपील की
मुख्य बिंदु:
- बिना सत्यापन वाले सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से फर्जी खबरें फैला रहे हैं।
- पुराने वीडियो और एडिट की गई तस्वीरें गलत दावों के साथ साझा की जा रही हैं।
- लोगों को किसी भी खबर को आगे भेजने से पहले फैक्ट चेक करने की सलाह दी गई है।
जमशेदपुर – सोशल मीडिया पर सिटिजन जर्नलिज्म के बढ़ते प्रभाव के साथ देशभर में फेक न्यूज़ और गलत सूचनाओं का प्रसार भी तेजी से बढ़ रहा है। आज कई लोग किसी भी वीडियो, फोटो या ब्रेकिंग अपडेट को उसकी सच्चाई जांचे बिना ऑनलाइन साझा कर देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीति, धर्म, दुर्घटनाओं और सार्वजनिक आपात स्थितियों जैसे संवेदनशील मामलों के दौरान फर्जी खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं। कई बार पुराने वीडियो को नए दावों के साथ साझा किया जाता है, जिससे लोगों के बीच डर और भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी खबर पर विश्वास करने या उसे आगे भेजने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह विश्वसनीय मीडिया संस्थानों या सरकारी स्रोतों से आई है या नहीं।
पाठकों को यह भी सलाह दी गई है कि वे भावनात्मक या चौंकाने वाली पोस्ट को तुरंत साझा न करें। केवल हेडलाइन पढ़ने के बजाय पूरी खबर पढ़ें और वीडियो या तस्वीरों की तारीख, स्थान और मूल स्रोत की जांच करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने से गलत सूचनाओं को रोकने और समाज को डर, नफरत तथा भ्रम से बचाने में मदद मिल सकती है।
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Excerpt: सोशल मीडिया पर बढ़ते सिटिजन जर्नलिज्म के बीच फेक न्यूज़ और गलत सूचनाओं के तेजी से फैलने पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है और लोगों से खबर साझा करने से पहले सत्यापन करने की अपील की है।
Category: प्रौद्योगिकी समाचार

