श्याम महोत्सव में उमड़ी श्रद्धा, भजनों पर झूमे भक्त

सोनारी में श्री श्याम सेवा संघ के 23वें महोत्सव के मौके पर निकली निशान यात्रा, गूंजे खाटू वाले के जयकारे

बाबा थारी चाकरी भी ठाकरी सी लागे जी…. जैसे भजनों पर भाव विभोर रहे श्रोता, निशान लिये थे 251 श्याम प्रेमी

जमशेदपुर। शनिवार को श्री श्याम सेवा संघ, सोनारी द्धारा 23 वां श्याम महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह धार्मिक कार्यक्रम संस्था के अध्यक्ष अशोक दीवान के नेतृत्व में दो चरणों में संपन्न हुआ। प्रथम चरण में दोपहर 01.30 बजे से सोनारी रांम मंदिर से विभिन्न मार्ग होते हुए लक्ष्मी नारायण मारवाड़ी मंदिर (महोत्सव स्थल) तक लगभग चार किलोमीटर निशान शोभा यात्रा निकाली गयी। जिसमें 251 श्याम प्रेमी निशान लिये बाबा श्याम का जयकारा लगाते और भजन गाते हुए चल रहे थे।

शोभा यात्रा में सबसे आगे दो ब़ड़े ध्वज एक बाबा श्याम और दूसरा हनुमान जी का लिये भक्त चल रहे थे। शोभा (निशान) यात्रा के दौरान भक्तों द्धारा लगाये जा रहे जय श्री श्याम, शीश के दानी, हारे का सहारा के जयघोष पूरे रास्ते गूंजता रहा।

शनिवार को सोनारी श्याममय रहा। निशान शोभा यात्रा और जागरण में कई गणमान्य लोग शामिल होकर बाबा श्याम का आशीर्वाद लिया। इससे पहले राम मंदिर में निशान की पूूजा मुख्य यजमान पियुष चूड़ीवाला और महेश अग्रवाल ने किया। पंडित विपिन पांडेय ने विधिवत रूप से पूजा अर्चना करायी। शोभा यात्रा में सबसे आगे एक घोड़ा पर सवार बाबा श्याम का रूप बनाये कलाकार और उसके पीछे खुले वाहन पर सजा बाबा श्याम का दरबार के साथ भक्त चल रहे थे।

श्याम तेरे भक्तों को तेरा ही सहारा हैंः- दूसरे चरण में रात्रि कीर्तन मे मुख्य यजमान उमा-पंकज अग्रवाल ने पूजा की और पंडित विपिन पांडेय ने विधिवत रूप से पूजा अर्चना करायी और सब भक्तों को रक्षा सूत्र बांधा।

भजनों की अमृत वर्षा के लिए आमंत्रित सुप्रसिद्ध भजन गायक आदर्श दधीच एवं शुभम अग्रवाल ने गणेश वंदना से रात 09.15 बजे भजन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने चल खाटू के धाम पता नहीं क्या तुझे मिल जाए…., बाबा थारी चाकरी भी ठाकरी सी लागे जी…., एक दिन तो आएगा मेरा खाटू वाला यही सोच मैंने खुद को सम्हाला…, मेरी झोपडी के भाग आज खुल जायेंगे श्याम आयेंगे…, श्याम तेरे भक्तों को तेरा ही सहारा हैं…, श्याम हमारा है तुम्हारा है श्याम ही हारे का सहारा है…., कभी रूठना ना मुझ से श्री श्याम सांवारे…, लोगों का सहारा तो बहुत होंगे मेरा तो सहारा सिर्फ तू है…, दीनानाथ मेरी बात छानी कोनी तेरे से…, आदि भजनों की शानदार प्रस्तुति देकर बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगायी। कलाकारों के भजनों पर श्रोता भाव विभोर हो उठे और जमकर तालियां बजाकर बाबा श्याम को रिझाया। देर रात 2 बजे श्याम प्रेमियों द्वारा बाबा की सामूहिक आरती के बाद छप्पन भोग बितरण के साथ महोत्सव संपन्न हुआ।

निशान यात्रा में शामिल भक्तों की सेवाः निशान यात्रा में शामिल भक्तों की मार्ग में चाय, पानी, जूस, कोल्डड्रिक्स आदि की सेवा क्रमशः स्वर्गीय बाबूलाल अग्रवाल के निवास स्थान के पास, आहार रेस्टुरेंट के सुरेश अग्रवाल, वनराज अखाडा के पास केसरी परिवार द्वारा, नर्स क्वाटर चौक मे श्याम मेडिकल के पास की गयी।

मुख्य आकर्षणः- महोत्सव का मुख्य आकर्षण निशान यात्रा, भव्य दरबार, विद्युत सज्जा, छप्पन भोग, भजनों की अमृत वर्षा रही। रात में महाआरती होने के बाद छप्पन भोग का वितरण किया गया। बंगाल के कुशल कारीगरो द्वारा बाबा श्याम का भब्य दरबार सजााया गया था। महोत्सव में सैकड़ों की संख्या में श्याम भक्त शामिल हुए।

इनका रहा योगदानः- इस महोत्सव को सफल बनाने में अध्यक्ष अशोक दीवान, श्याम अग्रवाल, अरविन्द अग्रवाल, मनीष गर्ग, चेतन अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, रुपेश जैन, राजेश टोड़ी, कमल अग्रवाल, बजरंग वर्मा, राहुल अग्रवाल, विजय गुप्ता, विवेक अग्रवाल, विनोद दीवान, महेश अग्रवाल समेत श्री श्याम सेवा संघ सोनारी के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

श्याम महोत्सव का महत्व :

श्याम महोत्सव (खाटू श्याम जन्मोत्सव) मुख्य रूप से महाभारत के वीर बर्बरीक, जिन्हें श्री कृष्ण ने कलियुग में स्वयं के नाम ‘श्याम’ से पूजे जाने का वरदान दिया था, के जन्मदिवस (कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी) के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव बाबा श्याम के प्रति अटूट आस्था, मनोकामना पूर्ति और उन्हें “हारे का सहारा” मानकर उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है।

श्याम महोत्सव मनाने के मुख्य कारण और मान्यताएं:

श्री कृष्ण का वरदान : पौराणिक कथा के अनुसार, बर्बरीक ने अपने प्राणों का बलिदान देकर श्री कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। प्रसन्न होकर कृष्ण ने उन्हें कलियुग में ‘श्याम’ के रूप में पूजे जाने का वरदान दिया।

हारे का सहारा : भक्तों का मानना है कि बाबा श्याम की पूजा करने से जीवन की हर मुसीबत दूर हो जाती है और हारे हुए को नया बल मिलता है।

कार्तिक शुक्ल एकादशी : इस तिथि को बाबा श्याम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन विशेष भजन, कीर्तन, निशान यात्रा और भोग (खासकर खीर-चूरमा) का आयोजन किया जाता है।

फाल्गुन मेला (विशेष आयोजन) : हालांकि जन्मोत्सव कार्तिक में है, लेकिन फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भी एक बड़ा मेला लगता है, जो विशेष रूप से बाबा श्याम की महिमा के प्रति समर्पित है।

राजस्थान के सीकर जिले के खाटू धाम में इस अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होते हैं।

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