झारखंड में विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के प्रोन्नति का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने खारिज की हेमंत सरकार की अपील, एकल पीठ का फैसला बरकरार
रांची : झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्रोफेसरों के लिए राहत की खबर है। प्रोफेसरों की प्रोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा है।
मालूम हो कि प्रोफेसरों की प्रोन्नति और वित्तीय लाभ से जुड़े मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दाखिल की थी। इस अपील पर सुनवाई के बाद झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मंगलवार को राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।
यूजीसी के वर्ष 2010 के विनियमन आधार पर विवाद
इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति से जुड़े यूजीसी के वर्ष 2010 की विनियमन के आधार पर राज्य सरकार द्वारा बनाए गए परिनियम के क्लॉज-3 को गलत ठहराया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि शिक्षकों को प्रोन्नति और उससे मिलने वाला वेतन एवं अन्य वित्तीय लाभ उसी तिथि से दिया जाना चाहिए, जिस दिन वे इसके पात्र बने हों।
गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने यूजीसी 2010 नियमों के तहत 15 दिसंबर 2022 को एक परिनियम बनाया था। इसमें शर्त जोड़ी गई थी कि 1 दिसंबर 2009 से अगस्त 2021 के बीच देय प्रोन्नति और वित्तीय लाभ शिक्षकों को 15 दिसंबर 2022 से ही मिलेगा।
सरकार की शर्त के कारण शिक्षकों को पिछले कई वर्षों का बकाया का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसके खिलाफ कलानंद ठाकुर सहित अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यूजीसी के नियम लागू करने में राज्य सरकार ने जो विलंब किया उसकी सजा शिक्षकों को नहीं दी जा सकती।
