चाईबासा में संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना को पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने बताया अपराध, दोषियों पर की आपराधिक कार्रवाई की मांग

  • घटना पर राज्य सरकार को घेरा, कहा — दो लाख का मुआवजा न्याय नहीं, अपमान है

जमशेदपुर/रांची: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में सरकारी अस्पताल में संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। अब इस मामले पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा कि यह घटना केवल चिकित्सा लापरवाही नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है।

चंपाई सोरेन ने कहा कि लोग अस्पताल इसलिए जाते हैं कि वहाँ उनके जीवन की रक्षा हो, लेकिन चाईबासा के मासूम मरीजों के साथ जो हुआ, उसने जनता के भरोसे और विश्वास को चकनाचूर कर दिया।

सिर्फ निलंबन नहीं, गिरफ्तारी होनी चाहिए

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संक्रमित रक्त चढ़ाने की यह घटना सीधे-सीधे आपराधिक कृत्य है। दोषियों पर हत्या की कोशिश जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए।

उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल कुछ अधिकारियों को निलंबित कर मामले की लीपापोती कर रही है।

सोरेन ने सवाल उठाया कि क्या मासूम बच्चों की जिंदगी की कीमत सिर्फ दो-दो लाख रुपये है? क्या यही न्याय है?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का यह रवैया असंवेदनशील और अमानवीय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पीड़ित परिवारों को कम से कम एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना चाहिए और आजीवन मुफ्त इलाज की व्यवस्था करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक मुआवजे का सवाल नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने का समय है। जो सरकारी तंत्र नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर सकता, वह शासन करने का हक खो देता है।

हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से खुली सच्चाई, मंत्री को देना चाहिए इस्तीफा
चंपाई सोरेन ने कहा कि यह और भी शर्मनाक है कि हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही मामला सामने आ सका।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को अब अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यह विभागीय विफलता का सीधा प्रमाण है।

उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री सोशल मीडिया पर जिस तरह मुआवजे की घोषणा कर एहसान जताने की कोशिश कर रहे हैं, वह जनता का अपमान है।
उन्होंने कहा कि मुआवजा नहीं, जवाबदेही चाहिए — और दोषियों को जेल।

जनता का भरोसा बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच न्यायिक समिति से कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार जवाबदेही नहीं तय करती, तो भाजपा इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाएगी।

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