जमशेदपुर में लिव-इन रिलेशन में रह रहे युवक ने की आत्महत्य,मानगो टीचर्स कॉलोनी की घटना, महिला हिरासत में
जमशेदपुर : मानगो थाना क्षेत्र के टीचर्स कॉलोनी में शुक्रवार की देर रात एक युवक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है।
मृतक की पहचान अभिषेक कुमार शर्मा (26 वर्ष) के रूप में की गई है। वह पूजा पांडे नामक विवाहित महिला के साथ पिछले कुछ महीनों से लिव-इन रिलेशन में रह रहा था।
सूचना मिलने पर मानगो थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर कमरे के भीतर प्रवेश किया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतक के परिजनों ने बताया कि पूजा पांडे विवाहित है और उसके दो बच्चे हैं। बावजूद इसके वह अभिषेक को अपने साथ रख रही थी।
परिजनों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से वह अभिषेक को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी, जिससे तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। फिलहाल पुलिस ने पूजा पांडे को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। साथ ही, मृतक के मोबाइल फोन और कमरे से बरामद साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि आत्महत्या के पीछे की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
जानिए लिव-इन रिलेशन का मतलब होता है
जब कोई अविवाहित पुरुष और अविवाहित महिला (या कुछ मामलों में विवाहित व्यक्ति भी) बिना शादी किए एक साथ पति-पत्नी की तरह एक ही घर में रहते हैं, तो उस स्थिति को लिव-इन रिलेशनशिप कहा जाता है।
इसे सरल शब्दों में समझिए
लिव-इन रिलेशन का अर्थ है दो वयस्क व्यक्तियों का बिना विवाह के, आपसी सहमति से एक साथ रहना।
कानूनी स्थिति (भारत में)भारत में
लिव-इन रिलेशन अवैध नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यह माना है कि अगर दो बालिग व्यक्ति आपसी सहमति से साथ रहना चाहते हैं, तो यह उनका संवैधानिक अधिकार (Right to Life and Personal Liberty) है।
हालांकि, यह शादी नहीं मानी जाती, इसलिए इससे मिलने वाले वैवाहिक अधिकार (जैसे विरासत या पति/पत्नी की कानूनी स्थिति) स्वतः लागू नहीं होते।
महिलाओं के अधिकार
सुप्रीम कोर्ट और कुछ राज्यों के कानूनों के अनुसार —लिव-इन रिलेशन में रह रही महिला को घरेलू हिंसा से सुरक्षा (Domestic Violence Act, 2005) के तहत संरक्षण मिल सकता है।
अगर यह संबंध “स्थायी और लंबे समय तक” चला है, तो महिला भरण-पोषण (maintenance) की भी हकदार हो सकती है।
सामाजिक दृष्टि से
हालाँकि कानून इसे मान्यता देता है, लेकिन भारतीय समाज के कई हिस्सों में लिव-इन रिलेशन को सामाजिक स्वीकृति नहीं मिली है।
इस वजह से अक्सर ऐसे रिश्तों को लेकर विवाद, पारिवारिक असहमति या मानसिक तनाव जैसी परिस्थितियाँ भी बन जाती हैं।

